मेराल : थाना क्षेत्र के यूरिया नदी से बालू माफियाओं द्वारा अवैध रूप से बालू का उठाव किया जा रहा है। दरअसल यूरिया नदी के करकोमा गांव के बालू घाट का टेंडर हुआ है, जिसका क्षेत्रफल 6 एकड़ 17 डिसमिल, अंचल अधिकारी यशवंत नायक ने घाट से बालू उठाव के शुरुआती दौर में बताया था। हालांकि दोबारा पूछे जाने पर कंफर्म याद नहीं रहने की बात करते हुए लगभग 2 एकड़ 17 डिसमिल होने की बात कही और बाकी यूरिया नदी के सभी घाट टेंडर मुक्त हैं। लेकिन यूरिया नदी में एक अस्थाई जगह पर टेंडर होने के कारण बालू माफियाओं ने उसी का फायदा उठाते हुए टेंडर पर्ची के आड़ में बालू माफिया टेंडर घाट से पर्ची लेकर अन्य घाटों से अवैध तरीके से बालू का उठाव कर रहे हैं।
खुलेआम बालू का उठाव कर महंगे रेट पर बिक्री किया जा रहा है।
ट्रैक्टर लोडिंग करने वाले मजदूरों से पूछे जाने पर बताया कि पर्ची करकोमा के टेंडर घाट से कटता है और बालू यहां से उठाव किया जाता है। ट्रैक्टर लेबरों के अनुसार टेंडर ठेकेदारों के आदमी ने इसी बात का फायदा उठाते हुए, एक पर्ची देकर प्रति ट्रैक्टर ₹200 के हिसाब से अवैध उगाही करने की बात कही।
इस पर अंचल अधिकारी से पूछे जाने उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत हमें प्राप्त हुई है। टेंडर घाट क्षेत्र के अलावा अन्य घाट व नजदीकी गांव से बालू उठाव करने एवं अवैध रूप से टेंडर ठेकेदारों के आदमियों द्वारा अन्य घाट से पैसे की उगाही का जांच किया जाएगा। अगर सही पाया गया तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
टेंडर ठेकेदारों द्वारा फर्जी तरीके से पर्ची देकर अन्य घाटों से बालू का उठाव करवाना सही नहीं है।
इधर पंचायत के मुखिया दुखन चौधरी ने कहा कि इस तरह के धांधली अगर बंद नहीं हुआ तो हम लोग पूरे ग्रामीण जनता मिलकर इसका विरोध करेंगे और इसके शिकायत उपायुक्त महोदय को आवेदन देकर अवगत कराएंगे। हमने पहले ही इस मसले पर स्थानीय विधायक सह पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर को अवगत करा चुके हैं। हमारे पंचायत हासनदाग में 600 से ऊपर पीएम आवास का कार्य चल रहा है अगर अवैध रूप से बालू का उठाव नहीं रुके तो छोटे-छोटे नदियों से बालू समाप्त हो जाएगा और सरकारी योजनाओं में तय समय पर पूरा करने में बाध्यता होगी।
आगे उन्होंने झारखंड सरकार के सिस्टम और विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव के छोटे-छोटे नदियों को टेंडर कर पूंजीपतियों को हाथों में देना सरासर पर सवाल खड़ा करता है।
जिस तरह से सरकारी योजना पीएम आवास हो, मनरेगा से संचालित पशु शेड, स्वच्छता विभाग से शौचालय, 15 वें वित्त से नाली, पीसीसी पथ निर्माण करने के लिए अपने क्षेत्र के छोटे-छोटे नदिया रहने के बाद भी पूंजीपति ठेकेदारों से महंगे रेट पर बालू की खरीदारी कर योजनाओं को पूरा करना बहुत ही कठिन हो जाएगा। जिस तरह से लॉकडाउन में लोगों का कमर टूटा है, वहीं सरकारी योजनाओं को पूरा करने में भी आम जनों को महंगाई का भुक्तभोगी बनना पड़ेगा।