कांडी : प्रखंड क्षेत्र अन्तर्गत गोसांग गांव के कोदवड़िया टोला में नीलगायों के आतंक से किसान परेशान होकर खेती छोड़ने को विवश है। इस संबंध में मुरलीधर पाण्डे ने तत्काल नीलगाय के विचरण पर रोक लगाने संबंधि कोई ठोस कारवाई करने की माग सरकार से की है। कांडी प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गाव में नीलगाय का आतंक कायम है।

कांडी प्रखंड क्षेत्र के प्रभावित गाव के किसानों ने हरी सब्जी, तेलहन, मक्का के साथ खड़ी फसल की खेती करना छोड़ दिया है। किसान उक्त फसलों का पौधा तैयार करने में एड़ी चोटी एक कर देते हैं। और जब पौधा में फल फूल लगता है व कुछ लाभ प्राप्त करने का समय आता है तो दिन हो या रात बेखौफ बधार में विचरण करने वाला नीलगाय उसको अपना बना बनाया भोजन के रूप् में चट कर जाता है।
किसानों के मनसूबे पर पानी फेरने वाले इस विशालकाय पशु के विचरण पर रोक लगाने संबंधि कोई सरकार की कारगर नीति नहीं होने के कारण लोग खेती करने से मुह मोड़ ले रहे है। ग्रामीण किसानों के आजीविका और आर्थिक श्रोत का मुख्य साधन खेती नीलगाय के आतंक की भेंट चढ़ने के कगार पर आ गया है।
इस संबंध में प्रगतिशील किसान मुरलीधर पाण्डेय एवं भोला मेहता का कहना है कि फसलों पर नीलगाय के आतंक को देखते हुए सरकार को चाहिए कि प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारी प्रतिनियुक्त कर नीलगाय के आतंक पर काबू पाए। इसी प्रकार अन्य कई किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत से डीजल पंप के माध्यम से सिंचाई की सुविधा प्राप्त होने के बाद नगदी फसल की खेती काफी अधिक मात्रा में होने लगी थी।
लेकिन नीलगाय के आतंक ने किसानों की खुशहाली और आर्थिक समृद्धि पर मानो पानी फेर दिया। नीलगाय के आतंक ने किसानों का कमर तोड़ दिया है। इसपर सरकार को शीघ्र काबू पाने की जरूरत है।