भवनाथपुर : स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने सीएचसी के सामने संचालित आधा दर्जन से अधिक मेडिकल दुकान और पैथोलॉजी जांच घरों में छापेमारी अभियान चलाकर बगैर कागजात और रजिस्ट्रेशन के चला रहे संचालकों को दुकानों को बंद करने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ ही घंटे बाद ही अवैध मेडिकल और पैथोलॉजी जांच घर खुल गए। जिससे क्षेत्र के लोगों ने मेडिकल और पैथोलॉजी जांच घरों के संचालकों और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।
बतातें चलें कि सीएस डॉ अशोक कुमार के आदेश के आलोक में सीएचसी प्रभारी डॉ दिनेश कुमार ने बीते 10 सितंबर को सीएचसी अस्पताल के सामने संचालित हो रहे आधा दर्जन से अधिक मेडिकल दुकान और पैथोलॉजी जांच घरों की जांच की थी।
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जिसमें कई दुकानदारों ने दुकान संचालन का कोई कागजात और रजिस्ट्रेशन नहीं होने की बात कही थी। जबकि कई दुकानदारों ने अपने अपने दुकानों को धड़ाधड़ सटर गिराकर फरार हो गए थे। जिसके बाद प्रभारी ने मेडिकल और पैथोलॉजी संचालकों को बगैर कागजात और रजिस्ट्रेशन कराए दुकान बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के कुछ ही घंटे के बाद दुकानदारों ने दुकान खोल दिए। जिस पर दोबारा से प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल का गार्ड को भेजकर खुली दुकानों को बंद करवाया था। इस दौरान एक मेडिकल व पैथोलॉजी संचालक एचएच पाल को फर्जी कागजात पर दुकान संचालन को लेकर पुलिस को सुपुर्द किया था। इतना सब होने के बाद भी अवैध रूप से संचालित कर रहे मेडिकल और पैथोलॉजी संचालक पर कोई असर नहीं हुआ और दुकान पूर्व की तरह खोल रहें हैं।
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जिसकी चर्चाओं का बाजार गरम है कि आखिर विभाग को अवैध दुकान संचालकों पर कोई नहीं करनी थी, तो यह जांच के नाम पर नौटंकी करने से क्या फायदा था।
इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ दिनेश कुमार ने बताया कि भवनाथपुर प्रखंड क्षेत्र में एकमात्र दुकान संचालक के पास ही पैथोलॉजी जांच घर संचालित करने का रजिस्ट्रेशन है। उन्होंने बताया कि जांच किये थे, सभी से दुकान के कागजात और रजिस्ट्रेशन की मांग भी थी, लेकिन किसी ने न तो कागजात दिखाए और न ही दुकान का रजिस्ट्रेशन ही। उन्होंने कहा कि ऊपर से दबाव के कारण अग्रेतर कार्रवाई नहीं कर पा रहें हैं। बिना निबंधन के जांच घर चलाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि भवनाथपुर में दर्जनों जांच घर का निबंधन नहीं है। जांच घरों का निबंधन नहीं होने की वजह से विभागीय स्तर पर इसकी सुनवाई करने वाला भी कोई नहीं है।