भवनाथपुर : मुख्य बाजार परिसर के पीछे गुजरने वाली सदाबह नदी लोगों के द्वारा अतिक्रमण और कचड़ा फेंके जाने के कारण आज अपना अस्तित्व खोते हुए सिर्फ बरसाती नाला बन कर रह गया है। जबकि छठ जैसे महान पर्व में विभिन्न क्लब और समाजसेवी के द्वारा 48 घंटे साफ सफाई कर स्वक्षता अभियान कहें या छठी मईया के लिए श्रम दान करते नहीं थकते।
बताते चलें की उक्त नदी बुका से भवनाथपुर चपरी सिवान तक आते-आते कई जगहों पर लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है।जिसमें सिंचाई के लिए पानी को बांध दिया जाता है। इसके भवनाथपुर बाजार तक पहुंचते ही लोगों के द्वारा नदी के जमीन को अतिक्रमण कर घर बना लिए गए। बाजार के सैकड़ों दुकानों और नदी किनारे बने घरों के सारे कचड़े और गंदा पानी नदी में ही समाहित होता है।
जिससे नदी में केवल प्लास्टिक कार्टून सहित अन्य वेस्ट सामन फेंका जा रहा है।
इसके बाद कर्पूरी चौक पहुंचते ही पुल के पास मीट-मुर्गा दुकानदार के द्वारा नदी में ही सारा मांस का कचड़ा फेंक दिया जाता है। और चपरी शमशान घाट तक पहुंचते ही नदी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इतना से लोगों को जी नहीं भरा तो कई जगहों पर अवैध रूप से नदी का बालू उत्खनन कर लिया जाता है, जिससे नदी एक विधवा की तरह उजाड़ दिखने लगी है।