रंका : अनुमंडल क्षेत्र के बरवाही गांव के आदिवासी बहुल खटखटिया टोले में 60 घर की आबादी है। करीब 400 की संख्या के लिए दो चापाकल है, जो दोनो खराब है। गांव के बगल से छोटी नदी निकलती है। बरसाती नदी में कहीं कहीं पानी जमा रहाता है। उसी के आसपास चुंआडी बनाकर गांव के लोग पानी पीते है। पंचायती राज होने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने चापाकल की जवाबदेही पंचायत को सौंप दी। मुखिया को बार-बार जानकारी देने के बाद भी चापाकल की मरम्मत नहीं हुई।
टोले के निवासी बिंदेसर उरांव कहते हैं कि सब ओर आदिवासी सरकार की हल्ला है। पर हमलोग पीने के पानी के लिए भटकते हैं। आदमी जिस नाला या नदी से पी रहे हैं, हमारे गाय, भैंस बकरी भी उसी चुंआंडी से पानी पी रहे हैं।
टोले के ग्रामीण मजदूरी करने जाते हैं, शाम को लौटने पर उसी चुवाडी से पानी लाकर भोजन बनाने व पीते हैं।
गांव के गिरवर उरांव बताते हैं कि चापानल कई महीनो से खराब है। मुखिया से मांग करने पर भी नहीं बना। हमलोग चापानल के पानी से नहीं बल्कि प्राकृतिक जल से जुडे है। गांव में नदी है, सब जानवर, बकरी, आदमी चुवाडी नाला से पानी पीने पर एकदम स्वस्थ और तंदरुस्त हैं। जिनको पीने के पानी की दिलाने की जिम्मेदारी मिली है, वे नाच गाना कराते हैं। हम प्रकृति के संतान चुवांडी के पानी से संतुष्ट हैं।