सगमा : धुरकी जिला मुख्यालय गढ़वा से पश्चिम दिशा की ओर 60 किलोमीटर की दूरी पर धुरकी प्रखंड सह अंचल कार्यालय अवस्थित है. जो अंचल सह प्रखंड 1965 से कार्यरत है. जिसमें कूल हल्का 5 पंचायत 8 राजस्व ग्राम 28 हैं जिसकी कुल आबादी 2011 के जनगणना के अनुसार 55469 है जो वर्तमान में लगभग यह आबादी करीब 80 हजार के लगभग पहुंच चुकी है.
इधर धुरकी अंचल के कुल 28 गांव में कुल भूमि 59050.81 एकड़ भूमि है जिस का वर्गीकरण निम्न प्रकार है गैरमजरूआ आम 610.45 एकड़ गैरमजरूआ खास11928.77 एकड़ वन भूमि 29779.50 एकड़ रैयती भूमि 16230 एकड़ परती भूमि 12671.44 एकड़ अन्य भूमि 502.09 एकड़ जिसमें कृषि योग्य भूमि 9855.56एकड़ है जो धुरकी अंचल कार्यालय में कुल 6 हजार किसानों का जमाबंदी अंचल कार्यालय में है.
धुरकी अंचल क्षेत्र के 90% किसानों का मुख्य पेशा कृषि है. जो भगवान भरोसे निर्भर है. यहां के किसानों के लिए खेती के लिए पानी का कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. ना ही कोई उपयुक्त साधन बनाई गयी है. जबकि अंचल क्षेत्र में पनघटवा गांव में एक डैम का निर्माण किया गया है. जिसका लाभ धुरकी अंचल के किसानो को नही मिलता है.जिसका लाभ अन्य चार प्रखंडो में गढ़वा ,मेराल,डंंडई ,व रमना को होता है. नुकसान सिर्फ धुरकी अंचल को होता है. जो कि डूब क्षेत्र मुकम्मल धुरकी अंचल क्षेत्र में हैं.
यहां के किसानों को अपनी खेती के लिए भगवान भरोसे रहना पड़ता है. समय पर मानसून साथ दिया तो यहां के किसान फसल कमाने में सफल हो पाते हैं.अगर समय पर मानसून साथ नहीं दिया तो किसानों को नुकसान होता है. जो पिछले वर्ष अन्य प्रखंडों में कम बारिश होने के बाद भी कुछ फसल हुई थी. लेकिन पानी के अभाव में धुरकी प्रखंड क्षेत्र पूरा सुखड़ के चपेट में था.
जबकि अंचल की
करीब 80 हजार की आबादी मे 6000 किसान है .किसान की कुल भूमि 59050.81 एकड़ में 9855.56 एकड़ भूमि कृषि योग्य है.जो यहां के किसान अपनी खेती भगवान भरोसे करते है.
प्रखंड स्तर से कुछ किसान को खेती के लिए मनरेगा योजना से कुप मिला है जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है. जो सक्षम किसान हैं जिनके खेतों में कूप का निर्माण हो गया है खेती पटवन कर खेती कर लेते हैं. अन्य किसान थोड़ा बहुत बारिश होने के बाद खेती तो कर देते हैं.लेकिन समय पर बारिश नहीं होने पर वह काफी उदास हो जाते हैं. क्योंकि खेती पटवन के लिए उनके पास कोई उपयुक्त साधन नहीं है. जिस वजह से किसानों को अपनी खेती पर निर्भर रह कर भी नुकसान उठाना पड़ता है.