whatshotDeveloped by : O2OSELL.COM
💗 27265985
Loading...


गिरगिट की तरह रंग बदलते, नेताओं के नक्शे कदम पर बढ़ चले हैं कार्यकर्ता...

location_on गढ़वा access_time 03-Dec-23, 08:57 AM visibility 693
Share



गिरगिट की तरह रंग बदलते, नेताओं के नक्शे कदम पर बढ़ चले हैं कार्यकर्ता...


विवेकानंद उपाध्याय check_circle
संवाददाता



गढ़वा : हरिशंकर परसाई का एक बहुचर्चित व्यंग्य है...प्रजावादी समाजवादी. इस लेख में उन्होंने राजनीति के दलबदलू का एक चित्र खींचा था और आश्चर्य किया था कि दक्षिण और उत्तरी ध्रुव जैसी बात करने वाले सत्ता के लिए कैसे एक-दूसरे से हांथ मिला लेते हैं? कैसे बड़ी आसानी से एक दूसरे को पानी पी -पीकर कोसने वाले बिना किसी संकोच के एक-दूसरे के अपने हो जाते हैं. सिद्धांत और मूल्य-विहीन राजनीति के इस खेल में मात सिर्फ मतदाता का होता है, जो अपने वोट से जनप्रतिनिधि को यह सोचकर कर चुनता है कि इस बार पिछले वाले नेता जी तथा उनका गणेश परिक्रमा करने वाले किचन कैबिनेट के कार्यकर्ता रूपी चट्टे बट्टे को भी सबक सिखा कर रहेंगे. पर ऐसा कभी हो पता है क्या? दरअसल चुनाव जीतने वाले के हाथ में पावर चला जाता है. और वोटरों की लालसा धारी की धरी रह जाती है. क्योंकि भले ही लोकतंत्र को वोटर का राज कहा जाता है, पर यह राज उसी क्षण का होता है जब मतदाता वोट दे रहा होता है. उसके बाद तो उसे यह पूछने का हक भी नहीं होता कि नेताजी मैंने तो आप की नीतियों, घोषणाओं और सिद्धांतों के लिए आपको वोट दिया था, और आप आपके पक्ष में मतदान करने वाले मतदाताओं से बगैर कुछ पूछे ही चुपचाप उन नीतियों, घोषणाओं और सिद्धांतों के विरोधियों से गलबहियां मिलाने में पीठ थपथपाते फिर रहे हैं? नेताओं की तो फितरत होती ही है कि वह अपने सुविधा के अनुसार कल तक जिसकी पीठ थपथपाते नहीं थकते थे. उसे गालियां देने लगते हैं.पर अब ऐसी ही ट्रेड अब नेताओं के पीछे घूमने वाले सत्तालोलुप मलाई काटने के चक्कर वाले कार्यकर्ताओं की भी बन गई है. आये दिन कार्यकर्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पाले में आते-जाते दिखते हैं. यह प्रवृत्ति किसी एक दल के कार्यकर्ताओं में नहीं है. सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं. हां इतना जरूर है की सत्ता की मलाई की लालसा वाले बहुसंख्याक गणेश परिक्रमा करने वाले ऐसे कार्यकर्ता भूत भविष्य के सिवा वर्तमान की ओर ज्यादा भागते हैं क्योंकि भविष्य तो आने वाले समय में सुधर हीं लेंगे भला वर्तमान को क्यों खराब किया जाए? हमारी सारी राजनीति सत्ता की मलाई काटने की घटिया खेल बनकर रह गयी है, और इस खेल में वास्तविक हार उस आम नागरिक की होती है जिसने पहले वाले को सबक सिखाने के लिए दूसरे को वोट देकर चुनाव जीताती है।
आम लोगों को खुले सपने दिखाकर भरमाया जाता है, और फिर अगले चुनाव आने तक वह अपना हाथ मलता ही रह जाता है. और गणेश परिक्रमा करने वाले चट्टे-बट्टे अपना उल्लू आराम से सीधा कर रहे हैं।




Trending News

#1
कोरवाडीह पंचायत के रोजगार सेवक को 5000 रुपये की घूस लेते एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा

location_on गढ़वा
access_time 23-Apr-25, 12:21 PM

#2
संगीत शिक्षक आनन्द कुमार चौबे को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 09:48 AM

#3
देर रात लूट की वारदात का पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार, दो फरार

location_on गढ़वा
access_time 13-Jun-25, 03:40 PM

#4
गढ़वा में अवैध हथियार के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार, दो देसी कट्टा बरामद

location_on गढ़वा
access_time 18-Jun-25, 03:42 PM

#5
इंदिरा गांधी रोड पर युवक को गोली मारकर घायल किया गया

location_on गढ़वा
access_time 30-Jun-25, 08:41 PM


Latest News

गढ़वा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई का गठन, कवि सम्मेलन में गूंजे राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकार के स्वर

location_on गढ़वा
access_time 15-Apr-26, 03:50 PM

कला धरोहर यात्रा का दूसरा चरण संपन्न, शिव पहाड़ी गुफा तक पहुँचा कला जत्था

location_on गढ़वा
access_time 07-Apr-26, 10:56 AM

गढ़वा के परिहारा गाँव में साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ का शुभारंभ, संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

location_on गढ़वा
access_time 01-Apr-26, 11:29 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 02:27 PM

संगीत शिक्षक आनन्द कुमार चौबे को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 09:48 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में कला साधिका संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 15-Mar-26, 11:29 PM

पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच ने पूरे किए 21 वर्ष, 22वें वर्ष में प्रवेश — कला, संस्कृति और समाज सेवा का सतत अभियान जारी

location_on गढ़वा
access_time 01-Feb-26, 06:58 PM

जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और आत्मविशास को बढ़ाती हैं विज्ञान, कला और शिल्प प्रदर्शनी : अजय कुमार वर्मा

location_on गढ़वा
access_time 01-Feb-26, 10:51 AM

सुसंस्कारित समाज का आधार है संयुक्त परिवार : नीरज श्रीधर स्वर्गीय

location_on गढ़वा
access_time 09-Jan-26, 02:30 PM

हनुमान जी की आराधना कलयुग में सबसे सरल और विशेष फलदायी है : डॉ. टी पीयूष

location_on गढ़वा
access_time 30-Dec-25, 09:58 PM

o2osell.com का एप गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें।
Get it on Google Play