मझिआंव : ली दुसरे के यहां शरण: प्रखंड क्षेत्र के मोरबे पंचायत के करीवा डीह के भलुहि गांव निवासी मनोज चौधरी43बर्ष की एक तरफ 19अगस्तकी मुत्यु जॉन्डिस बीमारी से वाराणसी में हो गई,वही अंतिम क्रिया क्रम हुए दो-तीन दिन बिता नहीं कि दूसरी आफत आ गई, जो खपरैल मिट्टी के मकान था शुक्रवार के शाम लगभग 5:00 बजे अचानक भर -भराकर गिर गया।
जिसके अंदर सो रहे दिव्यांग बेटा सहित चार लोग बाल -बाल बचें। जानकारी देते हुए स्वर्गीय मनोज चौधरी की पत्नी कांति ने बताई की उसके ऊपर एक -से -बढ़कर एक दु:खों का पहाड़ टूट रहा है।रोते हुए उसने बताई कि उसके पति मनोज चौधरी की मृत्यु 19 अगस्त को ईलाज के क्रम में वाराणसी में हो गया।वे जौंडिस रोग से ग्रसित थे, वह गरीबी के कारण किसी तरह से कर्ज लेकर रांची के निजी अस्पताल में ईलाज कराया गया, जहां चिकित्सकों के द्वारा जबाब देते हुए बाहर ले जाने को कहा गया ।
अंत में बनारस के एक निजी मनी नामक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अपने पति से 18 अगस्त को भेंटकर घर रात्री में बनारस से 9:00 बजे घर आई उसके बाद उसके सुबह में उनके पति की मृत्यु19 अगस्त को हो गया ,और उनका शव घर एंबुलेंस के द्वारा लाया गया। वह किसी तरह कर्ज महाजन लेकर अपने पति के ईलाज में लगभग 4:40 लाख रूपए लगा दी परंतु उसका पति नहीं बच सके। उन्होंने यह भी बताई की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड से एक लाख10 हजार रुपए एवं वहीं घर से कर्ज लेकर 3लाख 30हजार नगद लेकर लगायी फिर भी उसके पति नहीं बच सकें।उनका कार्यक्रम किए दो-तीन दिन हुआ भी नहीं था कि 1 सितंबर दिन शुक्रवार के लगभग शाम 5बजे खुद कांति देवी जो बीमार थी एवं अपने बड़ा बेटा बादल 14वषॅ,बेटी ज्योति 12वषॅ एवं सबसे छोटा बेटा जो दोनों पैर एवं दोनों आंख से दिब्यांग है 10 वर्षीय पुत्र आकाशको लेकर उसी घर में सोए हुए थे,जो बाल बाल बच गए अन्यथा हम सभी चारों वही गिरे घर के मलवे में दबकर रह जाते ,समय रहते हुए भागकर जान बचाई।
उसने यह भी बताई कि छोटा बेटा दिव्यांग जन्म से नहीं है बल्कि जन्म के 1 साल के बाद उसका ऐसी स्थिति हुई काफी इलाज कराया परंतु बातचीत नहीं हो सका। बड़ा बेटा बादल वर्ग नव में अपने नाना कृष्णा चौधरी कांडी प्रखंड के सुंडी पुर गांव में रहकर पढ़ाई करता था, घर गिर जाने के कारण व दूसरे के यहां गांव के ही महावीर चौधरी के यहां सारा सामान रखी है, एवं अपने बच्चों के साथ विनोद चौधरी के यहां शरण ली है। उन्होंने बताई की सारा पैसा कर्ज लेकर अपने पति के ईलाज में लगा दी, फिर भी नहीं बच सकें।इधर घर बीहीन हो गई ,तीसरा उसके खाने के लिए घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है ,और जुलाई एवं अगस्त 2 माह का स्थानीय डीलर राजेश्वर राम के यहां से राशन तक नहीं उठा पाई थी, क्योंकि वह पति के ईलाज में दौड़ते रही।
बीडीओ एवं संबंधित पदाधिकारी से सहयोग की गुहार लगाई है। इधर इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी नितेश भास्कर ने बताया कि सरकारी प्रावधान के अनुसार मृतक की पत्नी को पारिवारिक लाभ,खाने के लिए राशन एवं रहने के लिए तत्काल व्यवस्था किया जाएगा। इसके बाद अंबेडकर आवास सहित अन्य सरकारी लाभ देने की बात कही।