गढ़वा : जीएन कॉन्वेंट(10+2) स्कूल में संस्कृत सप्ताह समापन समारोह का आयोजन किया गया। संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत स्कूली छात्रों के बीच सुभाषितानि,नीतिश्लोक संस्कृत वाचन कला के विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस समापन समारोह की शुरुआत विद्यालय के निदेशक मदन केशरी एवम उपप्रचार्य बसंत ठाकुर ने इस सम्मलित रूप से दीप प्रज्वलन करकिया। सिनीयर वर्ग की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति की गई। अपने संबोधन में निदेशक ने कहा कि संस्कृत सप्ताह का आज हमलोग समापन समारोह मना रहे है इसमें 5वीं से 10वीं वर्ग के छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृतगीतिका के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण श्लोकों की प्रस्तुति की गई, जो बहुत ही सराहनीय है।
इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चो मे भाषाई ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण होता है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, वैज्ञानिकों ने भी संस्कृत को सर्वोपरि माना है। संस्कृत भाषा सर्वोत्कृष्ट है, संस्कारों की रक्षा शिक्षा से ही है जिसे हमें संस्कृत के द्वारा ही प्राप्त होता है। हमें अपने चरित्र की रक्षा स्वयं करनी चाहिए, संस्कार और संस्कृति का बीजारोपण संस्कृत करता है। संस्कृत हमारे देश की प्राचीनतम भाषा है। समय के बदलाव के कारण कई प्रांतीय भाषाएं लोकप्रिय हो गई लेकिन संस्कृत भाषा का महत्व अभी भी बरकरार है।सभी प्राचीन ग्रंथ, वेद, पुराण, गीता, आदि जैसे ग्रंथ संस्कृत में ही है अतः संस्कृत को इन ग्रन्थों का मुख कहा जाता है।
संस्कृत भारत राष्ट्र की एकता का आधार है। संस्कृत कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक उदय प्रकाश, संजीव कुमार, मुकेश भारती, नीरा शर्मा, सरिता दुबे, रिजवाना शाहीन, सुषमा तिवारी, सुनीता कुमारी नीलम केशरी, शिवानी कुमारी, खुर्शीद आलम, नरेन्द्र सिन्हा,आलोक सिन्हा, आदि की भूमिका सराहनीय रही। मंच का संचालन संस्कृत के जानकार सुषमा तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन नीलम केशरी ने की।
उपरोक्त प्रतियोगिता दो ग्रुप में कराई गई।
जूनियर ग्रुप में कक्षा पांचवी, छठी एवम सातवीं की छात्र छात्राओं ने भाग लिया जिसमें सातवीं कक्षा का रौशन दुबे और प्रतीक तिवारी प्रथम स्थान, छठी की सृष्टि कुमारी द्वितीय एवं पाँचवी की आर्या पाण्डेय तृतीय स्थान प्राप्त की वहीं सीनियर वर्ग कक्षा आठवीं, नवीं और दशमी के लिए नवम की मुस्कान तिवारी प्रथम, आठवीं की उज्जवला दुबे द्वितीय और आर्या पाण्डेय तृतीय स्थान प्राप्त की।
इस मौके पर समस्त बच्चों के बीच संस्कृत के प्रति लगाव और उत्साह देखें गए।