whatshotDeveloped by : O2OSELL.COM
💗 27191972
Loading...


समाज हित के लिये किये गए कार्य से जीवन धन्य हो जाता है: जीयर स्वामी

location_on बंशीधर नगर access_time 27-Aug-23, 06:30 PM visibility 653
Share



समाज हित के लिये किये गए कार्य से जीवन धन्य हो जाता है:  जीयर स्वामी


दिनेश पांडेय check_circle
संवाददाता



बंशीधर नगर : समाज हित के लिए किए गए कार्य से जीवन धन्य हो जाता है। अच्छे लोगों के इतिहास एवं दर्शन से समाज व राष्ट्र गौरवान्वित होता है। आनेवाली पीढियाँ भी उनके कृत्य को धरोहर के बतौर संजोकर सदैव सीख लेती रहती हैं। व्यक्ति को गृहस्थ आश्रम के दायित्व निर्वह्न के साथ ही समाज एवं राष्ट्र के प्रति भी अपनी जवाबदेही स्वयं तय करनी चाहिए। मानव को केवल अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति तथा परिवार-कुटुम्ब के लिए कार्य नहीं करना चाहिए। व्यापक हित के लिए संकीर्ण स्वार्थ का त्याग मानव धर्म है। श्री जीयर स्वामी जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वयं अथवा अपने परिजनों के हितार्थ साधन-संसाधन संग्रह करने में जीवन व्यतीत कर देता है, उसकी याद और कार्य प्रणाली परिजनों तक ही सिमट कर रह जाती हैं, लेकिन परिवार के साथ समाज हित में कार्य करने वाले व्यक्ति का स्मरण कर परिवार द्वारा गौरवान्वित महसूस किये जाने के साथ ही समाज उन्हें नमन करता है।
स्वामी जी ने कहा कि राजा परीक्षित द्वारा शुकदेव जी से मृत्यु को मंगलकारी बनाने हेतु किए गये प्रश्न लोकहित में बताया गया है। श्री शुकदेव जी भी इन प्रश्नों से अह्लादित होकर गंगा तट पर मृत्यु को स्वीकार करने हेतु अनशन पर बैठे राजा परीक्षित के पास उन्हें उपदेश देने और समाज के प्रति संदेश देने के लिए रूक गए। अन्यथा विरक्त सन्यासी होने के कारण शुकदेव जी कहीं रूकते नहीं थे। श्री स्वामी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति को तब तक चिंता एवं चिंतन करनी चाहिए जब तक समाज और परिवार पर उनका प्रभाव हो। श्री जीयर स्वामी ने कहा कि मूर्ति की पूजा करनी चाहिए। मूर्ति में नारायण वास करते हैं। मूर्ति भगवान का अर्चावतार हैं। मंदिर में मूर्ति और संत का दर्शन ऑखें बन्द करके नहीं करना चाहिए।
मूर्ति से प्रत्यक्ष रुप में भले कुछ न मिले लेकिन मूर्ति-दर्शन में कल्याण निहित है। एकलव्य ने द्रोणाचार्य की मूर्ति से ज्ञान और विज्ञान को प्राप्त किया। श्रद्धा और विश्वास के साथ मूर्ति का दर्शन करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद्य एवं मत्सर से बचना चाहिए। ये आध्यात्मिक जीवन के रिपु हैं। मत्सर का अर्थ करते हुए स्वामी जी ने बताया कि उसका शाब्दिक अर्थ द्वेष - विद्वेष एवं ईर्ष्या भाव है। दूसरे के हर कार्य में दोष निकालना और दूसरे के विकास से नाखुश होना मत्सर है। मानव को मत्सरी नहीं होना चाहिए। अगर किसी में कोई छोटा दोष हो तो उसकी चर्चा नहीं करनी चाहिए। जो लोग सकारात्मक स्वाभाव के होते हैं, वे स्वयं सदा प्रसन्नचित्त रहते हैं।
इसके विपरीत नकारात्मक प्रवृति के लोगों का अधिकांश समय दूसरे में दोष निकालने और उनकी प्रगति से ईर्ष्या करने में ही व्यतीत होता है।




Trending News

#1
कोरवाडीह पंचायत के रोजगार सेवक को 5000 रुपये की घूस लेते एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा

location_on गढ़वा
access_time 23-Apr-25, 12:21 PM

#2
संगीत शिक्षक आनन्द कुमार चौबे को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 09:48 AM

#3
देर रात लूट की वारदात का पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार, दो फरार

location_on गढ़वा
access_time 13-Jun-25, 03:40 PM

#4
गढ़वा में अवैध हथियार के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार, दो देसी कट्टा बरामद

location_on गढ़वा
access_time 18-Jun-25, 03:42 PM

#5
इंदिरा गांधी रोड पर युवक को गोली मारकर घायल किया गया

location_on गढ़वा
access_time 30-Jun-25, 08:41 PM


Latest News

गढ़वा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई का गठन, कवि सम्मेलन में गूंजे राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकार के स्वर

location_on गढ़वा
access_time 15-Apr-26, 03:50 PM

कला धरोहर यात्रा का दूसरा चरण संपन्न, शिव पहाड़ी गुफा तक पहुँचा कला जत्था

location_on गढ़वा
access_time 07-Apr-26, 10:56 AM

गढ़वा के परिहारा गाँव में साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ का शुभारंभ, संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

location_on गढ़वा
access_time 01-Apr-26, 11:29 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 02:27 PM

संगीत शिक्षक आनन्द कुमार चौबे को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 09:48 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में कला साधिका संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 15-Mar-26, 11:29 PM

पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच ने पूरे किए 21 वर्ष, 22वें वर्ष में प्रवेश — कला, संस्कृति और समाज सेवा का सतत अभियान जारी

location_on गढ़वा
access_time 01-Feb-26, 06:58 PM

जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और आत्मविशास को बढ़ाती हैं विज्ञान, कला और शिल्प प्रदर्शनी : अजय कुमार वर्मा

location_on गढ़वा
access_time 01-Feb-26, 10:51 AM

सुसंस्कारित समाज का आधार है संयुक्त परिवार : नीरज श्रीधर स्वर्गीय

location_on गढ़वा
access_time 09-Jan-26, 02:30 PM

हनुमान जी की आराधना कलयुग में सबसे सरल और विशेष फलदायी है : डॉ. टी पीयूष

location_on गढ़वा
access_time 30-Dec-25, 09:58 PM

o2osell.com का एप गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें।
Get it on Google Play