गढ़व
गुरु सिंधु पर्यटन स्थल की कनेक्टिविटी होगी पूरी
रमकंडा प्रखंड के तेतरडीह पुल से आधा दर्जन गांवों की 20 हजार आबादी होगी लाभान्वित।
जिले में चिनिया व रमकंडा प्रखंड में पांच करोड़, 82 लाख, 200 रुपए की लागत से दो नए पुल का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाले इस पुल के निर्माण की ग्रामीण कार्य विभाग झारखंड सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। शीघ्र ही टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य आरंभ किया जाएगा।
जानकारी देते हुए गढ़वा विधायक झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने बताया कि जिले के चिनियां प्रखंड अंतर्गत गुरु सिंधु राजबांस मुख्यपथ से गुरु सिंधु जलप्रपात होते हुए चपकली रोड में ढेंगुरा नदी पर तीन करोड़, 13 लाख ,11 हजार, 800 रुपए की लागत से 51.33 मीटर तथा रमकंडा प्रखंड में गोबरदाहा मुख्य पथ से कुशवार, तेतरडीह होते हुए होमिया पथ में तेतरडीह नाला पर दो करोड़, 68 लाख, 88 हजार, 400 रुपए की लागत से 34.22 मीटर लंबा पुल का निर्माण कार्य किया जाएगा।
मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि चिनियां के ढेंगुरा में पुल निर्माण से गुरु सिंधु पर्यटन स्थल तक हो रहे सड़क निर्माण की कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी। गुरु सिंधु को बेहतर पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में पहला कदम पूरा हो गया है। अब उसे और बेहतर बनाने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चिनिया जैसे आदिवासी एवं आदिम जनजाति बहुल क्षेत्र पूरी तरह से बेहतर सड़क से जुड़ जाएगा। वर्षों से पिछड़ा चिनिया क्षेत्र का और बेहतर विकास होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी एवं गुरु सिंधु पर्यटन स्थल के विकास से क्षेत्र की आर्थिकी में भी सुधार होगा। मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि रमकंडा भी जिले का पिछड़ा, आदिवासी एवं आदिम जनजाति बहुल क्षेत्र है।
तेतरडीह नाला पर पुल के निर्माण से रमकंडा एवं रंका प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांवों की लगभग 20 हजार की आबादी लाभान्वित होगी। वर्षो से यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। बलीगढ़ पंचायत में नौ करोड़ की लागत से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस पुल के निर्माण नहीं होने से उसकी कनेक्टिविटी पूरी नहीं हो पा रही थी। अब इस पुल एवं सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने से लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही उनके जीवन स्तर में भी सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि गढ़वा का पिछड़ा से पिछड़ा क्षेत्र भी आज तक जहां विकास की रोशनी नहीं पहुंची थी, अब ऐसे पिछड़े क्षेत्र का भी कोना - कोना विकास की रोशनी से जगमगाएगा।