भवनाथपुर : आर एम डी सेल भवनाथपुर का विगत छह माह से बंद पड़े तुलसी दामर खदान के कारण हजारों मजदूरों का रोजी-रोटी पर ब्रेक लग गया है। बावजूद इसके ना तो सेल प्रबंधन और न ही राज्य सरकार के द्वारा अभी तक खदान को चालू कराने के प्रति गंभीरता दिखाई जा रही है। यहां तक की स्थानीय जनप्रतिनिधि व यूनियन की गतिविधि भी स्थिति शिथिल पड़ गई है।
मजदुरो में भी जनप्रतिनिधि व यूनियन के प्रति संशय बना हुआ है कि किस नेता व दल के साथ लड़ाई लड़ी जाए, जिससे खदान जल्द खुले व छह माह से चल रही बेरोजगारी दूर हो। परंतु सभी लोग कोरोना महामारी दूर होने व लॉक डाउन खुलने का इंतजार में हैं। सभी लोगों का एक ही मंतब्य है कि अब लॉक डाउन खुलने के बाद ही कुछ होगा।
बताते चलें कि बीते 16 फरवरी से अनापत्ति प्रमाण पत्र सेल के पास नहीं होने का हवाला देकर खनन विभाग ने सेल के तुलसी दामर डोलोमाइट खदान का मौखिक तौर पर चालान बन्द कर दिया, जिससे संवेदको का ट्रांसपोटिंग कार्य पूर्णतः बंद हो गया।
ट्रांसपोटिंग बन्द होते ही पत्थर का उठाव बन्द होने पर आक्रोशित मजदूर इंटक दुबे गुट व एटक यूनियन, पलामू खान मजदूर संघ के नेतृत्व में सेल के प्रसाशनिक भवन पर काम की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठ गए तो, दूसरा इंटक रेडी गुट के नेता द्वारा सेल के जीएम से वार्ता में होली बाद खदान खुलने के मौखिक आश्वाशन पर वे अपने घर चले गए, जिसके कारण मजदूर दो गुट में बंट गए। परंतु कुछ मजदूरों के साथ 20 दिनों तक यूनियन का प्रदर्शन जारी रहा।
इसी बीच 22 मार्च को पूरे देश मे कोरोना महामारी को लेकर लॉक डाउन घोषित होते ही सरकारी अधिकारियों के द्वारा यूनियन से वार्ता कर धरना को समाप्त करा दिया गया। परंतु इस बीच सेल प्रबंधन ने दोनों संवेदकों को मजदूरों को रीअटैचमेंट करने की चिठी देकर अपना पला झाड़ लिया और बीते 31 मार्च को तुलसी दामर का लीज अवधि भी समाप्त हो गया। जिससे सभी लोगों के खदान खुलने का आश टूट सा गया।
यहाँ बताते चले कि विगत साढ़े तीन दशकों से इस खदान को सेल के राजनीतिक यूनियन के दबाव व संवेदकों के एकजुटता से चलते रहा। पूर्व में इस खदान में सात संवेदक कार्य करते थे, परंतु धीरे - धीरे नियमों में बदलाव के बाद, अंत में मात्र दो संवेदक ही शेष बचे रहे। यूनियन व राजनीतिक दलों का प्रभाव कम होने के बाद सेल ने इसका फायदा उठाते हुए सेल कर्मचारियों को भी आर एस, ट्रांसफर करने के साथ ही 2013 में भवनाथपुर लाइमस्टोन खदान को फोरेस्ट क्लियरेंस का बहाना बना कर खदान को बंद कर दिया और यूनियन के छह माह तक लम्बी लड़ाई के बाद 180 टोकन धारी मजदूरों को छटनी करने में कामयाब रहा।
उसी तर्ज पर सेल ने तुलसी दामर को भी अनापत्ति प्रमाण पत्र समाप्त होने का हवाला देकर खदान में कार्यरत 850 मजदूरों को छटनी का मनसा पाल रखी है और कामयाबी की ओर भी है।
अब तक खदान खोलने की दिशा में स्थानीय जनप्रतिनिधि विधायक भानु प्रताप शाही के द्वारा विधान सभा में लिखित व मौखिक तौर पर खदान बन्द होने से हजारों लोगों को बेरोजगार होने व जल्द खदान खोलने की मांग किया गया है जबकि इंटक दुबे गुट, एटक यूनियन व पलामू खान मजदूर संघ के द्वारा भी उपायुक्त गढ़वा से लेकर मुख्य मंत्री, खान सचिव को पत्र के माध्यम से खदान बन्द होने व अविलंब उड़ीसा, व एमपी के राज्य सरकार के तर्ज पर तकनीकी समस्या को दूर करते हुए खदान खोलने का मांग किया था।
परंतु अब तक सरकार के द्वारा किसी भी प्रकार का जबाब नहीं मिला।
तो वर्तमान में अब एक पांचवा एक नवनिर्मित इंटक यूनियन तिवारी गुट के द्वारा मजदूरों को एक जुट कर बीते 21 अगस्त से अपने केंद्रीय नेता की उपस्थिति में सेल के प्रसाशनिक भवन पर घेराव की मंसूबा को सरकारी तंत्र ने कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन का हवाला देते हुए कार्यक्रम का परमिशन नहीं मिलने के चलते उनके मंसूबा पर पानी फेर दिया। जिससे एक बार फिर बेरोजगार मजदूरों के उमीद टूटने लगी है।
सूत्रों की माने तो अगर राज्य सरकार एक वर्ष के लीज एक्सटेंशन करती है तो अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए सेल पूर्व में रांची हाईकोर्ट में अपनी दायर याचिका पर स्टे लेकर एक वर्ष तक कार्य करते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर खदान को पुनः चालू कर सकती है और इस क्षेत्र को उजाड़ होने से बचा सकती है।
परंतु जानकारों की मानें तो यह सेल का खदान खुलने के कम आसार अब दिखते है। ऐसा सेल के शिथिल कार्य प्रणाली व राज्य सरकार के कार्य प्रणाली से प्रतीत होता है। जिससे अभी तक खदान खुलने के आसार कम ही दिख रहे हैं।