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प्रोजेक्ट स्वास्थय शुचिता से सरकार अस्पतालों में ज्यादा हुई 7164 डिलीवरी

location_on गढ़वा access_time 03-Jan-23, 07:04 PM visibility 711
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प्रोजेक्ट स्वास्थय शुचिता से सरकार अस्पतालों में ज्यादा हुई 7164 डिलीवरी


नितेश कुमार तिवारी check_circle
संवाददाता



गढ़वा : उपायुक्त, गढ़वा रमेश घोलप की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट स्वास्थ्य शुचिता को लेकर प्रेस मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ समाहरणालय के सभागार में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमे उप विकास आयुक्त, गढ़वा राजेश कुमार राय, सदर उपाधीक्षक अवधेश सिंह, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, साकेत कुमार पाण्डेय एवं डीपीएम प्रवीण कुमार सिंह आदि अन्य पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थें.*_ _*उपायुक्त श्री घोलप ने प्रेस वार्ता का आरम्भ लोगों का अभिनन्दन व नववर्ष की बधाई देकर की.*_ _*गढ़वा जिले में प्रसव के मामले में निजी अस्पतालों में चल रहे अनैतिक गतिविधियाँ जैसे- बिना चिकित्सक के प्रसव/ऑपरेशन कराना, सरकारी अस्पतालों से नेक्सस के माध्यम से मरीजों को पैसे के लालच में निजी अस्पतालों में ले जाना, माता मृत्यु/शिशु मृत्यु की जानकारी छुपाना, गलत सहमती पत्र लगाकर अस्पतालों का निबंधन एवं सञ्चालन करना आदि.*_ _*इनपर रोक लगाकर क़ानूनी कार्रवाई करना, सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार कर गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क एवं सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराना, मरीजों का आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेनडिचर कम करना, सरकारी अस्पतालों में रोस्टर सुधार कर चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना.*_ _*प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना एवं जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ देना एवं सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का विश्वास बढाने के उद्देश्य से उपायुक्त, रमेश घोलप के द्वारा 11 जुलाई 2022 को “प्रोजेक्ट स्वास्थय शुचिता” की शुरुवात गढ़वा जिले में की गई.*_ *अभियान हेतु अपनाई गई रणनीति के तहत उठाये गये कदम* _इस अभियान को सफल बनाने के लिए रणनीति के तहत निम्न कार्रवाईयां की गईं:-_ *• अवैध रूप से निबंधित एवं संचालित निजी अस्पताल के संचालकों/क्लीनिकों पर प्राथमिकियां दर्ज हुईं.* _दिनांक 11 जुलाई 2022 को उपायुक्त के नेतृत्व में गढ़देवी अस्पताल की जांच हुई और वहां पर बिना चिकित्सा अनुभव के इंजिनियरिंग/डिप्लोमा डिग्रीधारक संचालक द्वारा गर्भवतियों/शिशुओं के जान के साथ खिलवाड़ कर ऑपरेशन का मामला संज्ञान में आने पर संचालक एवं सरकारी अस्पताल में कार्य करने वाली एक एएनएम को गिरफ्तार कर उनपर क्लिनिकल एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट एवं आईपीसी की धारा- 419/420/386/180(B) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. जुलाई के बाद से अबतक इस तरह के मामलों में कुल 09 अस्पतालों पर प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं एवं 17 अस्पतालों को सील किया गया है. इसमें अबतक कुल 09 गिरफ्तारियां हुईं हैं._ *• निजी अस्पताल के संचालकों के साथ बैठक* _जुलाई माह में ही जिले के कुल निबंधित 117 अस्पतालों के संचालकों के साथ उपायुक्त एवं सिविल सर्जन के द्वारा बैठक कर उनको सीईए के प्रावधानों के तहत अस्पतालों में आवश्यक मानव संसाधन (चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ आदि), आवश्यक चिकित्सा उपकरणों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी डी गई. अहर्ता नही रखने वाले अस्पतालों को खामियों को सुधारने अन्यथा लाइसेंस सरेंडर करने की चेतावनी डी गई एवं भविष्य में जांच के क्रम में अनियमितता मिलने पर सख्त क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई._ *• निबंधित अस्पतालों की जांच* _सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों की जांच की गई एवं ससमय सुधार हेतु निर्देश, अनियमितता मिलने पर सील करना आदि कार्रवाईयां की गई._ *• सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के रोस्टर में सुधार* _सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के रोस्टर में सुधार करते हुए, विशेष कर सदर अस्पताल में रात्रि के समय चिकित्सक के उपलब्ध नही होने की शिकायत को दूर किया गया एवं 24X7 प्रसव एवं अन्य मरीजों के लिए चिकित्सक उपलब्ध रहे इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की गई._ *• सहिया एवं सहिया साथियों के साथ बैठक* _उपायुक्त, श्री घोलप की उपस्थिति में जिले के सहिया/सहिया साथी/बीटीटी के साथ बैठक कर उनको इस अभियान की जानकारी दी गई एवं गर्भवती महिलाओं को अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों के बारे में सतर्क करने एवं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रचार-प्रसार करने की बात कही. इसके अतिरिक्त सिविल सर्जन द्वारा सहिया साथियों के साथ बैठक कर अभियान की जानकारी डी गई._ *• सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों एवं पदाधिकारियों के साथ बैठक* _उपायुक्त, श्री घोलप के द्वारा सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों एवं पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें निजी अस्पतालों में चल रहे अनैतिक गतिविधियों, जान-माल की क्षति आदि से सम्बंधित जानकारियां दी गई. प्रोजेक्ट स्वास्थ्य शुचिता को सफल बनाने के लिए उपस्थित चिकित्सकों एवं पदाधिकारियों से अपील की गई._ *• औचक निरीक्षण के लिए 07 विशेष पदाधिकारियों की नियुक्ति* _सदर अस्पताल में 24X7 चिकित्सकों की उपस्थिति नही रहने की शिकायत मिल रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए 07 कार्यपालक दंडाधिकारियों की नियुक्ति रात्रि 09 बजे से सुबह 09 बजे तक सदर अस्पताल में विभिन्न पालियों में कार्यरत चिकित्सकों/पारा मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके._ *• अनावश्यक रेफरल को कम करने हेतु विशेष निगरानी* _सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद अन्यत्र अस्पतालों में रेफर के मामले कम करने के लिए सिविल सर्जन, सदर उपाधीक्षक के द्वारा प्रत्येक रेफरल का कड़ाई से निगरानी की जा रही है._ *• प्रोजेक्ट स्वास्थ्य शुचिता के तहत प्रचार-प्रसार* _जनप्रतिनिधियों/पीआरआई मेंबर्स के साथ बैठक कर अभियान की जानकारी दी गई. जिले के विभिन्न पंचायतों में आयोजित सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में प्रचार-प्रसार कर लोगो को जागरूक किया गया._ *प्रोजेक्ट स्वास्थ्य शुचिता की उपलब्धियां* ```सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी में औसतन 54% की बढ़ोतरी``` _अभियान आरम्भ होने के पूर्व वर्ष 2022 में माह अप्रैल, मई, जून में संस्थागत प्रसव की संख्या क्रमशः 2071, 2168, 2306 थी, जो अभियान शुरू होने के पश्चात बढ़कर माह जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 2821, 3452, 3487, 3494, 3486 तथा 3508 हो गई. अभियान के पूर्व तीन महीने में औसतन 2180 थी, जो अभियान के बाद बढ़कर छ: महीने में 3378 हो गई._ *सदर अस्पताल में संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि* _अभियान आरम्भ होने के पूर्व वर्ष 2022 में माह अप्रैल, मई, जून में संस्थागत प्रसव की संख्या क्रमशः 296, 305, 287 थी, जो अभियान शुरू होने के पश्चात बढ़कर माह जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 365, 441, 445, 442, 457 तथा 489 हो गई. अभियान के पूर्व तीन महीने में औसतन 296 थी, जो अभियान के बाद बढ़कर छ: महीने में 439 हो गई._ ```117 निजी अस्पतालों में 52 अस्पतालों ने किया लाइसेंस सरेंडर``` _प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच एवं कानूनी कार्रवाई के बाद चिकित्सकों की उपलब्धता बताते हुए जिले के 117 में से 52 अस्पतालों ने अपना लाइसेंस सरेंडर किया, जिसकी प्रतिशतता 44% है._ ```सभी सरकारी अस्पतालों में अनावश्यक रेफरल के मामले में 80% की कमी आयी``` _अभियान के पूर्व माह अप्रैल, मई, जून में अस्पतालों से 296, 305 एवं 287 मामले अन्यत्र अस्पतालों में रेफर किये गयें, जबकि जून के मुकाबले दिसंबर माह में संस्थागत प्रसव में 52% की वृद्धि हुई, एवं रेफरल के मामले में बड़ी संख्या में कमी आई, जो माह जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 365, 441, 445, 442, 457 एवं 489 हो गई._ ```सदर अस्पताल में अनावश्यक रेफरल के मामले में 90% की कमी आयी``` _अभियान के पूर्व माह अप्रैल, मई, जून में अस्पतालों से 187, 170 एवं 163 मामले अन्यत्र अस्पतालों में रेफर किये गयें, जबकि जून के मुकाबले दिसंबर माह में संस्थागत प्रसव में 70% की वृद्धि हुई, एवं रेफरल के मामले में बड़ी संख्या में कमी आई, जो माह जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 86, 72, 53, 41, 15 एवं 06 हो गई._ ```जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (C-SECTION) के मामलों में वृद्धि``` _अभियान के पूर्व माह अप्रैल, मई, जून में क्रमशः 20, 05 एवं 01 थी, जो माह जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 19, 26, 45, 42, 55 एवं 63 हो गई._ ```सरकारी अस्पतालों में OPD की संख्या में हुई वृद्धि``` _अभियान के पूर्व तीन महीनों अप्रैल, मई, जून में क्रमशः 29644, 30042 एवं 36555 था, जो अभियान के पश्चात बढ़कर छ: महीनो जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 40109, 42059, 45549, 39169, 40032 एवं 40254 हो गई. अभियान के पूर्व तीन माह का 32080 जबकि अभियान के पश्चात् बढ़कर अगले छ: महीनो में 41195 हो गया._ ```सदर अस्पताल में OPD की संख्या में हुई वृद्धि``` _अभियान के पूर्व तीन महीनों अप्रैल, मई, जून में क्रमशः 4688, 5309 एवं 7153 था, जो अभियान के पश्चात बढ़कर छ: महीनो जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 8619, 8901, 9705, 9986, 10324 एवं 9864 हो गई. अभियान के पूर्व तीन माह का 5716 जबकि अभियान के पश्चात् बढ़कर अगले छ: महीनो में 9566 हो गया._ *• माता एवं शिशु मृत्यु की संख्या में कमी* _अभियान के पूर्व तीन महीनों अप्रैल, मई, जून में मातृ मृत्यु संख्या क्रमशः 05, 04 एवं 04 थी, जो अभियान के पश्चात छ: महीनो जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसंबर में क्रमशः 07, 01, 04, 01, 00 एवं 00 हो गई, जबकि शिशु मृत्यु की संख्या अभियान के पूर्व क्रमशः 22, 28, 32 थी, जबकि अभियान के पश्चात् क्रमशः 02, 05, 12, 06, 02, 01 हो गई._ _*उपायुक्त श्री घोलप ने कहा कि जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार जिले के सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करने के लिए प्रयासरत है. अभियान के पूर्व 6 महीनो के प्रसव के सभी मामलों का डोर टू डोर सर्वे कराकर किन निजी अस्पतालों में कितने डिलीवरी हुई है एवं किन अस्पतालों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति में अनैतिक गतिविधियाँ होतीं हैं. किन-किन अस्पतालों में कितनी माताएं एवं शिशुओं की मृत्यु हुई हैं, उनका डेटा बेस तैयार किया जा रहा है. तदोपरांत लोगों में जागरूकता और अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त संस्थानों पर सख्त क़ानूनी कार्रवाई की तयारी की जा रही है. केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य हेतु चलाये जा रहे सभी कार्यक्रमों का लाभ उनतक पहुँचाने एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करने के लिए जिले का स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन कटिबद्ध एवं निरंतर प्रयासरत है
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