गढ़वा :
गढ़वा सरकार भले ही आयुष चिकित्सा पद्धति की बढ़ावे देने की बात करे पर जिले में आयुष चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे है। सरकार द्वारा सदर अस्पताल परिसर में जिला संयुक्त औषधालय का भव्य भवन तो बना दिया है। मगर यहां चिकित्सा नाम मात्र ही होती है। औषधालय में आयुर्वेद, यूनानी तथा होमियोपैथी तीनों पद्धति से चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। मगर यहां मात्र होमियोपैथिक पद्धति से लोगों की चिकित्सा होती है। चिकित्सक के अभाव में आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा कक्ष में ताला लटका रहता है। अन्य पद्धति से इलाज कराने के लिए लोग आते तो हैं। मगर बगैर चिकित्सा कराए ही बैरंग वापस लौट जाते हैं। स्थिति यह है जिला आयुष पदाधिकारी डा कृष्ण कुमार मरीजों को देखते हैं तथा दवा भी देते हैं।
इसके अलावे चिकित्सालय में कोई प्रतिनियुक्त नहीं है। इस कारण उन्हें ही चपरासी से प्रभारी तक की सारी जिम्मेवारी निभानी पड़ती है।
- कम मात्रा में मिलती है दवा
संयुक्त औषधालय में होमियोपैथिक चिकित्सक होने के बावजूद सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध नहीं कराया जाता है। स्थानीय स्तर पर होने वाली बीमारी को दरकिनार कर पूरे राज्य के लिए एक जैसी दवा उपलब्ध कराई जाती है। जिससे चिकित्सक को परेशानी उठानी पड़ती है। मरीजों को कुछ दवा देने के बाद अन्य दवा बाहर से खरीदने को कहा जाता है। दवा की खरीददारी रांची के भरोसे होने से परेशानी उठानी पड़ती है। इससे गरीब मरीजों को काफी परेशानी होती है। वे इलाज के लिए आते तो हैं मगर बाहर से दवा नहीं खरीद पाते।
- वर्ष 2010 से चल रहा है संयुक्त औषधालय
जिला संयुक्त औषधालय वर्ष 2010 से चल रहा है। 12 मई 2010 को इसका उद्घाटन किया गया था। मगर औषधालय खुलने के बाद से कभी भी इसकी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाई है। कभी चिकित्सक नहीं रहते तो कभी दवा ही नहीं रहती। कुल मिलाकर संयुक्त औषधालय के नाम पर जिले में खानापूर्ति की जा रही है।
- जिले में मात्र दो चिकित्सक
होमियोपैथिक, आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा में सुधार के लिए जिले में 17 आयुष हॉस्पिटल है। जिसमें कुछ आयुर्वेद, होम्योपैथ और यूनानी हॉस्पिटल है। प्रत्येक हॉस्पिटल में चिकित्सक सहित पांच पद स्वीकृत है। पर कही भी चिकित्सक नहीं है। जिले के संयुक्त औषधालय में 13 स्वीकृत पद है। पर एक आयुष डॉक्टर है और एक आयुष चिकित्सा पदाधिकारी है।
बाकी के सभी पद् रिक्त है।
उपलब्ध संसाधन में हमलोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं। संसाधन, कर्मी व दवा उपलब्ध होंगे तो हम जिले में बेहतर आयुष चिकित्सा सुविधा दे सकते हैं।