गढ़वा : गठबंधन सरकार के घटक दलों में खटपट चलती ही है। बीते दिनों राजद को अपनी अपमानित किये जाने का राग बज रहा था तो पिछले दिनो जिले के दौरे पर आये प्रभारी मंत्री बादल पत्रलेख पर पुराने कांग्रेसियों ने जमकर हमला बोला।
इसकी पटकथा बीते 26 नवंबर को घंटाघर के उद्घाटन के दिन ही लिखी जा चुकी थी। सीएम के दौरे पर आने से कांग्रेस नेताओं को अपनी चमक दमक बढाने का मौका मिला था पर स्थानीय मंत्री मिथिलेश ठाकुर के चहेते नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय पाण्डेय ने कार्यक्रम स्थल से सभी कांग्रेसियों को बलपूर्वक बाहर करा दिया था।
हजारों लोगों के सामने जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, प्रदेश प्रतिनिधि और बडे नाम वाले नेताओं ने वहीं जमीन पर बैठकर नारा लगाते रह गये और सीएम के साथ आये कृषि सह जिले के 20 सूत्री क्रियान्वयन समिति के प्रभारी मंत्री बादल न तो कांग्रेसियों के पास गये न ही कोई बात करना मुनासिब समझा।
पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी भी कार्यक्रम बीच में छोड कर लौट गये। वहीं इस घटना के कारक अधिकारी संजय को मंत्री ने घंटाघर का जिम्मा देते हुए सम्मानित किया। कांग्रेसियों ने इसका बदला पिछले दिनो सार्वजनिक तौर मंत्री बादल को खूब खरी-खोटी सुना कर लिया।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आशिक अंसारी ने मंत्री बादल को तत्काल इस्तीफा देने की चुनौती दे डाली।वहीं अलख चौबे ने अगले चुनाव में खुल कर विरोध करने का ऐलान कर दिया।
सोशल मीडिया में इसको वायरल होने के बाद डेमेज कंट्रोल करने के लिए झामुमो नेताओं ने कांग्रेसियों को निशाने पर लेते हुए इसके लिए भाजपा नेता और पूर्व विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी की चाल बता रहे हैं।
जिला प्रवक्ता ने बयान में कहा कि मंत्री पर गलत आरोप लगाने वाले कांग्रेसी नेता ही संदिग्ध चरित्र के हैं।
वहीं भाजपा ने इस मामले से किनारा करते हुए इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि यह कांग्रेस के नेताओं और उनके मंत्री के बीच की बातचीत है इससे किसी को क्या लेना देना? ऐसे में जेएमएम को भी इसमें नहीं आना चाहिए। भाजपा का इससे दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। वैसे भी यह निक्कमी सरकार आपसी खींचतान से जनता का कोई काम नहीं कर रही है।