तालाबंदी से कपड़ा व्यवसाय चौपट
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03-06-2020, 11:19 AM
कपड़े की दुकान
विवेकानंद उपाध्याय
चैनल हेड
गढ़वा: झारखंड सरकार की प्राथमिकता में टेक्सटाइल तथा खनन उद्योग को प्रश्रय देकर रोजगार के नए अवसर तलाशना है। इसकी चर्चा स्वयं सुबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर चुके हैं। मगर सरकार की दृष्टि टेक्सटाइल उद्योग के प्रति अनलॉकडाउन -1 में कपड़ा कारोबार को खोले जाने की इजाजत नहीं दिए जाने से गंभीर नहीं दिख रही है।
एक तरफ सरकार झारखंड में रोजगार सृजन के लिए टेक्सटाइल उद्योग को स्थापित करना चाहती है, मगर दूसरी ओर टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े बड़े बाजार प्रबंधन के प्रति सरकार का रवैया खासकर कपड़ा व्यवसाय जिसमें रेडीमेड दुकान, खुदरा कपड़ा दुकान तथा होलसेल कपड़ा व रेडीमेड की दुकानें शामिल हैं, को खोलें जाने की इजाजत नहीं दे रही है। ऐसे में कैसे टेक्सटाइल के क्षेत्र में झारखंड आगे बढ़ेगा यह एक बड़ा सवाल है, माना इस कारोबार में भीड़-भाड़ की संभावना है, मगर इसे भी सोशल डिस्टेंसिंग के शर्त पर क्या नहीं खोला जा सकता है ?
वैसे भी आम इंसान की जिंदगी में रोटी कपड़ा और मकान तीन चीज महत्वपूर्ण माना गया है। कहने का तात्पर्य है कि इंसान को पेट भरने के लिए भोजन पहनने के लिए कपड़ा तथा सर छुपाने के लिए मकान की निहायत जरूरत है। ऐसे में कपड़ा के क्षेत्र में सरकार की दुकान खोलने का इजाजत नहीं देना अपने आप में बड़ा ही आश्चर्यजनक व अदूरदर्शिता पूर्ण कदम है। दरअसल कपड़ा जिंदगी का एक अहम हिस्सा तो है ही इससे भी बड़ी बात है की लॉक डाउन में महीनों से बंद रहने के कारण चौपट हो चुके कपड़ा व्यवसाईयों के कारोबार को अब और आगे बंद रखना कहीं से भी अनुकूल नहीं है।
इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि
कपड़ा कारोबार का क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें इस कारोबार से जुड़े व्यवसायियों के हित के साथ साथ रोजगार सृजन से भी जुड़ा हुआ है। इसे भी ध्यान में रखें जाने की आवश्यकता है। मिसाल के तौर पर आप किसी कपड़ा व्यवसाई के पास चले जाएं तो अकेली उसका मालिक दुकान चलाते नहीं दिखेगा क्योंकि गठरी उठाने वाले मजदूर से लेकर सेल्समैन तक की जरूरी कपड़ा कारोबारियों को पड़ता है। होलसेल के कारोबार में तो और अधिक रोजगार मिलता है। ऐसे में कपड़ा जगत से जुड़े लोगों के बीच काम कर रहे लोगों की मुश्किलों को ध्यान में रखकर भी सरकार को फैसला लेने की जरूरत है सरकार को समय रहते कपड़ा व्यवसाय, रोजगार तथा लोगों की जरूरत को अहमियत देते हुए जल्द से जल्द खोलने की इजाजत दे देनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मार्केट में चोरी छुपे जो कपड़ा का कारोबार चल रहा है इससे ग्राहकों पर भी असर पड़ रहा है। ग्राहकों को चोरी-छिपे माल खरीदने में ना तो मनचाहा कपड़े मिल पा रहे हैं, और ना ही उन्हें इस कारोबार के स्थापित प्रतिष्ठित संस्थानों में क्रय करने का अवसर, ऐसे में कहीं न कहीं व्यवसायियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी मनमानी कीमत चुकाने जैसी नुकसान पहुंच रहा है। वैसे भी इस कारोबार से जुड़े लोगों का धैर्य खो रहा है। चारों तरफ से विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं, ऐसे में कपड़ा कारोबार को बंद रखना झारखंड सरकार के लिए कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है।
इसके अलावा एक दूसरा सेक्टर है, श्रृंगार का शायद सरकार इसे विलासिता की परिधि में देख रही है। मगर श्रृंगार का मतलब सिर्फ कीमती फेशियल और साजो सामान से नहीं है बल्कि महिलाओं के रोज़मर्रा की आवश्यकता सिंदूर, बिंदिया, शीशा, कंघी से भी जुड़ा है। इसे घर में खाने में उपयोग होने वाली नमक की तरह परंपरागत जीवन शैली के हिसाब से जरूरत है। ऐसे में श्रृंगार जगत को भी कपड़ा की ही तरह खोलने की इजाजत मिलनी चाहिए।
कोरोना नियंत्रण को ले सरकार की चिंता इस महामारी के प्रति है, ऐसा सभी महसूस कर रहे हैं। लिहाजा कुछ प्रतिबंधों के साथ ही सही किंतु कपड़ा एवं श्रृंगार के कारोबार को भी नहीं खोलने के सरकार के निर्णय को पुनर्विचार करने की जरूरत है।
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