whatshot Developed by O2OSELL.COM favorite 28161890 readers visited
नूतन टीवी एप गूगल प्ले से इनस्टॉल करें । Get it on Google Play
Loading...


प्रवासियों को बफर जोन मानने से झारखंड से भागेगा कोरोना

👁 884

access_time 02-06-2020, 03:32 PM


share
लगमा कोरेण्टाइन सेंटर के बाहर सड़क जाम करते प्रवासी मजदूर


विवेकानंद उपाध्याय
चैनल हेड, नूतन टीवी

गढ़वा: झारखंड में आए दिन बढ़ रहे कोरोना पॉजिटिव की संख्या से आम लोगों की चिंता बढ़ रही है। पिछले करीब 3 महीने से घर में कैद रह कर कोरोना से मुक्ति पाने की आस में नए सिरे से रोजी रोजगार की अपेक्षा वाले लोगों को कोरोना पीड़ितों की बढ़ती संख्या घरों से बाहर निकलने में संशय में डाल रहा है। लोगों के सामने लॉकडाउन में गवां चूकी रोजी-रोटी की संकट उन्हें घर से बाहर निकल कर कुछ कर गुजरने ₹को मजबूर तो कर रहा है, मगर 600 से ऊपर का आंकड़ा पार कर चुके झारखंड में अब तक करोना को लेकर जो स्थिति बनी है वह यही है कि हर कोई आए दिन बढ़ रही कोरोना पॉजिटिव की संख्या से हैरान व परेशान है। लेकिन इस परेशानी के बीच अब यह साफ हो गया है कि झारखंड में करोना प्रवासी श्रमिकों में ही अधिकतम पाया जा रहा है। यहां प्रवासी श्रमिक में कोरोना पाए जाने की चर्चा के पीछे मूल उद्देश्य यह ध्यान दिलाना है कि झारखंड सरकार को अनलॉकडाउन 1 के ढील देने के फैसले में कंटेंटमेंट जॉन के साथ साथ बफर जोन को ध्यान में रखकर आगे बढ़कर कोरोना के लिए प्रवासी श्रमिकों को केंद्र में रखकर कोई प्लान बनाने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि यदि सिर्फ गढ़वा जिला को ही देख लें, तो गढ़वा फिलहाल झारखंड का सबसे अधिक कोरोना की संख्या में शुमार है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या टॉप लेवल पर यानि 62 का आंकड़ा छू चुका है यदि 62 इन कोरोना प्रभावितों पर गौर करें तो शुरुआती दौर के 3 कोरोना पोजिटीव को छोड़कर शेष सभी प्रवासी श्रमिक हैं। इसमें से भी वैसे अधिकतर श्रमिक हैं, जो महाराष्ट्र के मुंबई पुणे गुजरात के सूरत जैसे इलाके से लौट कर आए हैं। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि वह सिर्फ केंद्र के गाइडलाइन के अनुरूप ही कोरोना नियंत्रण की बफर जॉन चिन्हित करने में इलाका विशेष को न ध्यान में न रखकर परिस्थिति के अनुकूल प्रवासियों की यात्रा हिस्ट्री को ध्यान में रखकर योजना बनाए। केंद्र सरकार जिसे बफर जॉन कह रही है मतलब कंटेंटमेंट जोन के बाद का वह जोन जहां करोना फैलने की संभावना है उस जोन को इलाका न मानकर प्रवासी श्रमिकों के इंट्री से लेकर उनके घर पहुंचने तक के क्षेत्र को परिधि में रखकर योजना बनाने की जरूरत है। क्योंकि अभी जो परिस्थिति है उसका कागज पर चाहे जो हो मगर जमीन यानी व्यवहारिक तौर पर साफ दिख रहा है की प्रवासी श्रमिकों की भीड़ के सामने सरकार की स्क्रीनिंग से लेकर क्रोन्टाइन तक की व्यवस्था में कई खामियां हैं,जो करोना फैलाने के लिए काफी है। खामियां से तात्पर्य कि जो प्रवासी श्रमिक घर लौट रहे हैं उसमें से कुछ श्रमिकों की स्थिति यह है कि वे लोग पहले घर के लोगों के संपर्क में आ जाते हैं और स्क्रीनिंग केंन्द्र पर जो होमक्रोन्टाइन में जाते हैं उनके पास उनके घरों में न तो अलग रहने के कमरे हैं और न ही ऐसी जागरूकता कि वे अपने परिवार के सदस्यों से अलग रहे और जो सरकारी क्रौनटाइन सेंटर है वहां की बदहाली उन्हें अपने घर से ठीक उसी तरह से संपर्क रखने को मजबूर कर रहा है जैसे अक्सर देखा जाता है कि जेल के कैदी अपने घर से खाना मंगा कर भोजन करते हैं। वैसे ही हालत गढ़वा जिले के क्रोन्टीन सेंटरों की है। वहां पर ऐसी बदहाली है कि बगैर घर से सहयोग लिए 14 दिन गुजारना प्रवासी श्रमिकों के लिए बड़ा ही दुष्कर है, ऐसा इसलिए कि आए दिन यह खबर आती है की क्रोंनटाइन सेंटर के अव्यवस्था के खिलाफ प्रवासी सड़क जाम कर रहे हैं अथवा हंगामा कर रहे हैं। ऐसी हालात में साफ है कि यदि कोरोना को नियंत्रण में करना है तो इन प्रवासी श्रमिकों को केंद्र में रखकर स्क्रीनिंग से लेकर क्रोनटाइन सेंटर को दुरुस्त करना होगा साथ ही श्रमिकों के घर लौटने की यात्रा पर निगरानी भी रखनी होगी ताकि प्रवासी श्रमिक स्क्रीनिंग से पहले अपने घर वालों के संपर्क में नहीं पहुंच पाए।इसी तरह से अनलॉक डाउन वन की तैयारी भी झारखंड सरकार को करनी चाहिए वरना अभी जो कोरोना मरीजों की संख्या 600 का आंकड़ा पार किया है यह और तेजी से आगे बढ़कर सामुदायिक संक्रमण की ओर बढ़ सकता है।


हमें यूट्यूब पे सब्सक्राइब करने के लिए Youtube लिखे लाल बटन को दबायें।





संबंधि‍त ख़बरें




Top 3 Trending Editorial :


#1

कोरोना संकट में जनता के बीच से गायब हैं, चुनावी नेता


access_time 28-05-2020, 12:49 AM

#2

जिंदगी की राह में भारी पड़ने लगा है लॉकडाउन


access_time 29-05-2020, 11:46 AM

#3

रोजगार नहीं मिलने से उत्पन्न हो सकती है अराजकता, मुँह बाए खड़ी है प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का संकट


access_time 31-05-2020, 03:27 PM