राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर विशेष
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01-07-2020, 12:58 PM
डॉ. वीधान चंद्र राय
प्रशांत कुमार पाण्डेय, गढ़वा
मेकेनिकल इंजीनियर
राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर विशेष
गढ़वा : धरती पर भगवान का रूप माने जाने वाले, हमेशा मदद को तैयार बैठे लोग, जिन्हें हम - डॉक्टर कहते हैं। उनकी जरूरत सबको पड़ती है। आज एक जुलाई को हर साल हम सब इन्हीं महान लोगों को समर्पित करतें हैं जिनका बहुत बड़ा योगदान होता है हमारे जीवन में। उन्हीं को सम्मान देने के लिए नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor's day) मनाया जाता है।इसकी शुरुआत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने की थी। भारत सरकार ने सबसे पहले नेशनल डॉक्टर डे साल 1991 में मनाया था। इस बार डॉक्टर्स डे कोरोना महामारी के बीच आया है। ऐसे में यह दिन और भी खास बन जाता है। इस कोरोना काल में जैसे हमारे डॉक्टर्स और मेडिकल कर्मी, बिना अपनी सेहत की चिंता किए हमारी रक्षा करने में लगे हैं, उनका शुक्रिया करना तो बनता ही है।
क्यों मनाया जाता है?
हमारे देश में एक से बढ़कर एक महान चिकित्सक हुए, उन्ही में से एक महान भारतीय चिकित्सक डॉ. वीधान चंद्र राय का जन्म दिवस एक जुलाई को डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म 1882 में बिहार, पटना में हुआ था। उन्होंने अपनी चिकित्सकीय शिक्षा कोलकत्ता में पूर्ण की जिसके बाद एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की।
1911 में वे भारत वपस लौटे और अपनी चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की। आगे चलकर वे कोलकत्ता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता बने। वहां से वे कैंपबेल मेडिकल स्कूल और फिर कारमिकल मेडिकल कॉलेज गए। उनकी ख्याति एक शिक्षक एवं चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण बढ़ी।
भारतीय जनमानस के लिए प्रेम और सामाजिक उत्थान की भावना के कारण वे धीरे धीरे राजनीती की ओर बढ़े और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला। डॉ. राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।
आज का खास दिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले उन तमाम डॉक्टरों को समर्पित है जो हर परिस्थिति में डॉक्टरी मूल्यों को बचाए रखते हुए अपना फर्ज निभाते हुए मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहिया कराते हैं।
कैसे हुई शुरुआत?
भारत में इसकी शुरुआत 1991 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। तब से हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है। 80 वर्ष की आयु में साल 1962 में अपने जन्मदिन के दिन 1 जुलाई को ही उनकी मृत्यु हो गई।
आजकल के कुछ डॉक्टरों का पेशा चिंता का विषय बना हुआ है। व्यवसायिकता से भरे इस अंधी दौड़ में शामिल हो चुके कुछ चिकित्सकों ने आज सेवा भाव छोड़कर सिर्फ पूंजी जमा करने लगे हैं। हालांकि अभी भी इस पेशे में बढ़ती व्यवसायिकता के बीच कुछ ऐसे डॉक्टर भी हैं, जिनके अंदर अभी भी डॉक्टर के पेशे के रूप में सेवाभाव जिंदा है और उन्हें फिर से पुराने समय के लौटने की पूरी उम्मीद है, पर कुछ भी हो इनका योगदान सराहनीय है।
‘नेशनल डॉक्टर्स डे‘ के अवसर पर प्रदेश के सभी डॉक्टर्स को बधाई और शुभकामनाएं। आज का खास दिन उन तमाम डॉक्टर्स को समर्पित है, जो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे इंसानों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि एक नया जीवन भी प्रदान करते हैं।
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