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भाजपा जिलाध्यक्ष को ले दिग्गजों के बीच रस्साकशी, पलामू पर निर्भर करेगा कौन बनेगा गढ़वा का जिला अध्यक्ष

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access_time 22-06-2020, 06:28 PM


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भाजपा जिलाध्यक्ष पद के संभावित दावेदार की तस्वीर


विवेकानंद उपाध्याय
चैनल हेड, नूतन टीवी

गढ़वा : भाजपा भले ही झारखंड में सत्ता से फिलहाल दूर है, मगर केंद्र से लेकर झारखंड की राजनीति में भाजपा की चमक - धमक अभी भी इस कदर बरकरार है कि इस पार्टी से जुड़े संगठन पर कब्जा जमाने की रस्साकशी दिग्गजों के बीच जोरदार चल रही है। संगठन के मामले में प्रदेश अध्यक्ष की कमान भाजपा द्वारा दीपक प्रकाश को तथा विधायक दल के नेता का पद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को सौंपे जाने के बाद से, भाजपा की राजनीति नए सिरे से करवट ले रही है, जिसका असर हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव में देखने को तो मिला ही साथ ही झारखंड में प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर अभी से, मरांडी दीपक की खनक महसूस किया जा रहा है। बदले समीकरण में गढ़वा जिला भाजपा के अध्यक्ष पद को लेकर जो खेल शुरू हुआ है, वह फिलहाल परवान पर है। क्योंकि खबर है कि इस सप्ताह किसी भी समय भाजपा का प्रदेश नेतृत्व जिला अध्यक्षों की घोषणा कर सकती है ऐसे में गढ़वा जिला भाजपा के अध्यक्ष पद की दौड़ में भले ही आधा दर्जन के करीब सशक्त दावेदार जोर आजमाइश कर रहे हों, मगर असली खेल तो गढ़वा जिले की राजनीति से जुड़े दिग्गजों के बीच चल रही है। जो अपने भविष्य की सुरक्षा में जिला अध्यक्ष के रूप में ऐसे वफादार की तलाश में जोड़-तोड़ कर रहे हैं जो उनके इशारों पर संगठन की डोर को संचालित कर सकें। इन दिग्गजों में पलामू के सांसद बीडी राम पूर्व मंत्री व विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी पूर्व मंत्री व विधायक भानु प्रताप शाही के साथ - साथ पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी तथा गिरिनाथ सिंह का नाम शामिल हो सकता है। गढ़वा जिले की राजनीति में जुड़े ऐसे भाजपा नेता अपने - अपने पसंद का जिला अध्यक्ष बनाने के लिए जोर आजमाइश जो कर रहे हैं इस जोर आजमाइश में कौन किसको पछाड़ेगा यह तो जिला अध्यक्ष के नाम के घोषणा के बाद ही पता चलेगा। मगर फिलहाल जो स्थिति दिख रही है उसमें भाजपा के अंदर खाने में गढ़वा जिला भाजपा के अध्यक्ष पद के दावेदारों में वर्तमान जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी, ब्रजेश कुमार उपाध्याय, पूर्व जिला अध्यक्ष मुकेश निरंजन सिन्हा, ओमप्रकाश तिवारी, प्रमोद चौबे, इंद्रमणि जायसवाल, मुकेश चौबे तथा सूरज गुप्ता का नाम शामिल है। उक्त सभी दावेदार जिले की राजनीति में दिग्गज कहे जाने वाले किसी ने किसी नेता के संरक्षण में जिला अध्यक्ष की दौड़ में एक दूसरे को पछाड़कर आगे बढ़ने की होड़ में हैं। ऐसे में गढ़वा जिला भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर चाहे खुद को अध्यक्ष बनने के प्रति जितने भी दावे जिस किसी दावेदार के द्वारा किया जा रहा हो मगर सभी सशंकित हैं कि कौन अध्यक्ष बनेगा? लिहाजा अटकलबाजी लगाना भी बड़ा ही मुश्किल है। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला की गढ़वा एक ब्राह्मण बाहुल्य जिला है, जहां पर पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को चुनाव हारने के बाद इस जाति के पास अब कोई पद नहीं रह गया है, ऐसे में भाजपा इस बिरादरी के लोगों का तेजी से स्थानीय विधायक व सूबे के पेयजल स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के साथ बढ़ रहे झुकाव पर गौर करते हुए अपने परंपरागत ब्राह्मण वोट को साधने के लिए संभव है कि जिला अध्यक्ष के पद पर इस बार किसी ब्राह्मण जाति के किसी दावेदार को मौका दे दे। मगर यह भी इतना आसान नहीं है क्योंकि संगठन के खेल में गढ़वा तथा पलामू के बीच हमेशा से जातीय समीकरण भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियां बैठती रही है। मिसाल के तौर पर वर्तमान में पलामू जिला में भाजपा के जिला अध्यक्ष नरेंद्र पांडे हैं, जबकि गढ़वा जिले में गैर ब्राम्हण ओमप्रकाश केशरी। ऐसे में पलामू में कौन जिला अध्यक्ष बनेगा इस पर भी गढ़वा जिला भाजपा के अध्यक्ष के नामों को तय करने में पार्टी पूरी ध्यान देगी, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। तात्पर्य यह की पलामू में गैर ब्राम्हण बना तभी गढ़वा में ब्राह्मण जिलाध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा जिला अध्यक्ष के खेल में जहां तक गढ़वा जिले की राजनीति से जुड़े भाजपा के दिग्गज नेताओं का प्रश्न है, इसमें पलामू के सांसद बीडी राम तथा पूर्व मंत्री व विश्रामपुर के विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी के संदर्भ में चर्चा है कि ये दोनों नेता गढ़वा से ज्यादा पलामू में अपने पसंद का जिला अध्यक्ष बनाने के प्रति ज्यादा जोर लगा रहे हैं। ऐसे में इनके पसंद से ही पलामू और गढ़वा दोनों जिले में जिला अध्यक्ष बने यह संभव नहीं है। लिहाजा सांसद बीडी राम और विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी की राजनीति पैरवी गढ़वा जिले के जिला अध्यक्ष के पद के लिए बहुत मायने नहीं रखता है। रही बात जिले के दूसरे विधायक भानु प्रताप शाही का तो शाही के सामने मुश्किल है कि वे खुलकर अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के खिलाफ लॉबिंग नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इनके विधानसभा क्षेत्र से इंद्रमणि जायसवाल जैसे भाजपा के वरिष्ठतम एवं समर्पित कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष के दौड़ में शामिल तो हैं ही, वही युवा चेहरा मुकेश चौबे भी सशक्त दावेदार हैं। जिनके संदर्भ में चर्चा है कि उन्हें पलामू के सांसद बीडी राम भी पसंद करते हैं। ऐसे में भानु प्रताप शाही की रणनीति जिला अध्यक्ष के चुनाव में संभव है कि तटस्थ हो सकती है। रही बात पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी का तो चुनाव हारने के कारण इनकी चमक काफी फिका हुआ है तथा अभी आनेवाले विधानसभा चुनाव में 4 साल के करीब वक्त बचा है। ऐसे में इनके सामने जिला अध्यक्ष पद से ज्यादा प्राथमिकता खुद को भाजपा व गढ़वा जिले की राजनीति में बनाए रखने की हो सकती है। लिहाजा वर्तमान में श्री तिवारी जो झारखंड प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष पद पर आसीन हैं, अपनी पूरी शक्ति उस पद को बरकरार रखने अथवा उसके बराबर के किसी दूसरे संगठन के पद को हथियाने में लगाएंगे। इसके बाद ही गढ़वा जिला अध्यक्ष के लिए लॉबिंग करेंगे इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। रही बात पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह का तो, राजनीति के माहिर खिलाड़ी गिरिनाथ सिंह अपने पसंद का अध्यक्ष अपने राजनीतिक भविष्य के हिसाब से बनवाना चाहेंगे। इससे तो इन्कार नहीं किया जा सकता मगर इनके राजनीति को समझना किसी के लिए भी बहुत आसान नहीं होगा। ऐसे में भले ही गढ़वा जिला भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए नेताओं के बीच रस्साकशी तो चल रहा है, मगर इसका परिणाम क्या होगा? आकलन करना आसान नहीं है। पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि बदले परिस्थिति में गढ़वा जिला भाजपा अध्यक्ष का पद गढ़वा जिले की भाजपा की राजनीति में व्यापक बदलाव लाएगा।


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