मनरेगा में बिचौलिए की भूमिका प्रभावी,
कैसे रोजगार मिलेगा प्रवासी श्रमिकों को
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10-06-2020, 07:34 PM
वापस लौटे प्रवासी मजदूर
विवेकानंद उपाध्याय
चैनल हेड, नूतन टीवी
गढ़वा: कोरोना महामारी के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से लौटे प्रवासी श्रमिकों के रोजगार को लेकर झारखंड की सरकार निरंतर मैराथन बैठक कर रही है। सरकार की चिंता घर लौटे इन प्रवासी श्रमिकों को रोजगार कैसे मिले इसकी है? लिहाजा सरकार मनरेगा योजना को उपयोगी मानकर इससे अधिक से अधिक प्रवासी श्रमिकों के रोजगार देने के लिए कई योजनाएं लांच की है। तात्पर्य यह कि सरकार प्रवासियों को जिवकोपार्जन को लेकर पूरी तरह से परेशान है, मगर विकास योजना में दीमक की तरह लगे बिचौलिया हैं, जो मनरेगा योजना से मजदूरों को रोजगार देने की कोशिश में सहयोग करने के बदले मजदूरों के हक को सीधे डकार लेना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इस ओर इशारा भी किया था। उन्होंने कहा था कि मनरेगा से मजदूरों को सीधा लाभ मिले इसके लिए बिचौलियों से मनरेगा क़ो मुक्त किया जाएगा मगर बिचौलिए हैं जो मानने को तैयार नहीं है।
हालत यह है गढ़वा जिले में मनरेगा योजना से प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के जिला प्रशासन के प्रयास में सर मुड़ाते ओले पड़े की उक्ति को चरितार्थ करते हुए अभी से बिचौलिए पलीता लगाने को तैयार हैं। गढ़वा जिले के रमुना प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मनरेगा योजना के तहत डोभा निर्माण के मामले में एक बिचौलिया पर मजदूरों से काम न कराकर हफ्तों मजदूरों के रोजगार मिलने के अवसर को डोभा निर्माण की राशि लूटने के उद्देश्य से चंद घंटों में जेसीबी मशीन से निर्माण कराकर राशि निकासी की तरीका अपने को उजागर करते हुए, संबंधित बिचौलिया के खिलाफ रमुना के थाना प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का अनुशंसा किया है। शुक्र है रमुना के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया तथा शीघ्रता बरतते हुए इस पूरे मामले का न केवल जांच कराया बल्कि डोभा निर्माण में जेसीबी मशीन के इस्तेमाल के मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस को अनुसंधान की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। दरअसल रमुना प्रखंड के परसवान गांव में विगत 7 जून को सुलेखा देवी नाम की महिला के नाम पर मनरेगा योजना से एक डोभा मजदूरों को रोजगार देने के उद्देश्य स्वीकृत किया गया था, मगर उक्त डोभा का निर्माण मजदूरों के बजाय जेसीबी से करा दिया गया है।
गढ़वा जिले में जिस प्रकार से मजदूरों को रोजगार देने वाली मनरेगा जैसी योजना में भी बिचौलिए प्रभावी हैं। बिचौलियों की विकास योजना में भूमिका कोई नई बात नहीं है। समय - समय पर बिचौलियों द्वारा विकास योजना की राशि की बंदरबांट की खबरें भी आती रहती है। वैसे व्यवहारिकता में देखें तो विकास योजना के संचालन में बिचौलियों का गठजोड़ सरकारी तंत्र के साथ हमेशा से चर्चा में रहा है। मगर इस कोरोना संक्रमण काल में भी बिचौलिए अमानवियता का परिचय देते हुए मजदूरों के हक को लूटने के लिए तैयार हैं। ऐसे में प्रशासन के प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने की योजना कैसे सफलीभूत हो पाएगा यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। लिहाजा अभी से रमना के प्रखंड विकास पदाधिकारी की तरह सतर्क रहकर मनरेगा योजना के निर्माण कार्य में बिचौलियों को दंडित करते हुए जब तक बाहर नहीं किया जाएगा, तब तक प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने की प्रशासन का प्रयास महज आई वाश ही बनकर रह जाएगा।
वास्तव में प्रशासन श्रमिकों को मनरेगा से रोजगार देना चाहता है तो इसके लिए प्रशासन को चाहिए निर्माण स्थल से लेकर मजदूर के हाथ में हमेशा जॉब कार्ड ठीक उसी तरह से दिखलाई देना सुनिश्चित करावे जैसे किसी संस्थान में प्रवेश करने के लिए पास की जरूरत पड़ती है। ऐसा इसलिए की जिले में जॉब कार्ड धारी मजदूरों का जॉब कार्ड उनके हाथ में न होकर, बिचौलिए के पास गिरवी सा रहता है और बिचौलिए मजदूरों के नाम पर मनरेगा योजना के तहत किए गए मजदूरी की भुगतान को मजदूर के बैंक खाता में जाते ही बिचौलिए हस्तगत कर लेते हैं। इस कार्य में बिचौलियों को पूरी तरह से मनरेगा योजना से जुड़े सरकारी तंत्र एवं पंचायत प्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है, क्योंकि बदले में बिचौलिए उन्हें बंधी बंधाई पीसी की भेंट देते हैं।
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