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सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजर को करें दिनचर्या में शामिल

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access_time 08-06-2020, 10:40 AM


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सांकेतिक तस्वीर


विवेकानंद उपाध्याय
चैनल हेड, नूतन टीवी

त्वरित टिप्पणी गढ़वा: झारखंड में जिस तरह से कोरोना तेजी से पांव पसारते हुए कहर बरपा रहा है, उससे अब साफ हो गया है कि अनलॉक डाउन -1 में मिली छूट का भारी कीमत चुकाना पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन के भरोसे कोरोना का जंग जितना संभव नहीं है। बल्कि व्यक्तिगत स्तर से लेकर राजनीतिक सामाजिक तथा धार्मिक संगठनों को संकट के इस दौर में खुद से आगे बढ़कर पहल करने की जरूरत है, ताकि सोशल डिस्टेंस एवं मास्क लगाकर हीं घर से बाहर निकलना आम लोगों की दिनचर्या में शामिल किया जा सके। कोरोना को सामुदायिक संक्रमण की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगाने की जरूरत है। कम से कम गढ़वा के संदर्भ में तो यह कहा जाना कल रात्रि आई 3 कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद कहीं से अन्यथा नहीं ही होगा, क्योंकि एक ही परिवार के 3 लोग जो कोरोना पॉजिटिव मिले हैं, उसमें से कोई भी व्यक्ति प्रवासी नहीं हैं। या यूं कहें कि कोरोना के रेड जोन इलाके से घर नहीं लौटा है। ऐसे में यह परिवार करोना से कैसे और किससे संक्रमित हुआ यह कहना मुश्किल है। यह भी गौर करने की बात है कि जिस परिवार के 3 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं वह परिवार पढ़ा लिखा तथा जागरूक परिवार है। बावजूद कोरोना से संक्रमित हुआ है। यहीं पर कोरोना को लेकर हर किसी को नए सिरे से खुद को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व से ज्यादा सतर्क रहते हुए कोरोना संक्रमण से बचाव के तौर तरीकों को अपनाने पर विचार करने की जरूरत है साथ ही स्थानीय प्रशासन को गढ़वा के संदर्भ में अब नए सिरे से कोरोना के संक्रमण के फैलाव से रोकने के लिए योजना बनाने की जरूरत है। क्योंकि अब थोड़ी सी भी लापरवाही यहां के लोगों पर भारी पड़ सकती है और करोना तीसरे स्टेज में जा सकता है। इसके बाद संभालना बड़ी मुश्किल होगा। एक ही परिवार के जो 3 लोग गढ़वा शहर के पिपरा कला मोहल्ले के कोरोना से संक्रमित हुए हैं उसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका संपर्क जिले के कार्यपालिका, न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों से लेकर यहां तक कि राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण इनका संपर्क एक छोटे कार्यकर्ता, पत्रकार, एवं मंत्री स्तर तक भी हो सकता है। ऐसे में गढ़वा जिला के लिए बहुत ही बड़ी चिंता का विषय है, और प्रशासन का पॉजिटिव रिपोर्ट आने के घंटे बाद तक का जो रवैया दिख रहा है, उसे ऐसा नहीं लगता कि प्रशासन गंभीर होकर इस पूरे मामले को हैंडल कर रहा है। क्योंकि जिस कोरोना संक्रमित मोहल्ले को कोरोना के कारण रात में ही कंटेंटमेंट जोन घोषित कर सील हो जाना चाहिए था, उसे सुबह में सिल किया गया तथा पॉजिटिव रिपोर्ट आने के घंटों बाद रात्रि करीब 12:00 बजे प्रशासन प्रभावितों को इलाज के लिए शिफ्ट कराने के लिए पहुंचा। यहां प्रशासन के विलंब को बड़ा गौर करने की जरूरत है, क्योंकि जिला मुख्यालय में मिले इन तीन कोरोना वायरस मरीजो तक पहुंचने में प्रशासन को 4 घंटा का वक्त लग सकता है, तो सुदूरवर्ती इलाके का क्या हस्र हो सकता है, इसका आकलन कर समझा जा सकता है। कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए जिला प्रशासन की कैसी तैयारी है? और तब, जब जिला मुख्यालय के आला अधिकारियों के आवास से एवं सदर अस्पताल, गढ़वा से 500 मीटर के करीब संक्रमित का आवास है। ऐसे में कोरोना के मापदंडों के अनुरूप प्रशासन इस पूरे मामले को कितना गंभीर होकर हैंडल कर रहा है, इसका आकलन किया जा सकता है? वैसे भी गढ़वा जिला पहले से ही प्रवासियों के बीच तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को लेकर परेशान रहा है। प्रवासियों की घर वापसी का मामला जिला प्रशासन के आंकड़े के अनुसार करीब 70 हजार है। इन प्रवासियों का स्क्रीनिंग किया जा चुका है, तथा अभी भी तेजी से प्रवासी अपने घर लौट रहे हैं। यह सभी 70 हजार लोग दूसरे प्रदेशों से गढ़वा में प्रवेश किए हैं, जिनमें कुछ दूसरे जिले के हैं, मगर अधिकांश इसी जिले के हैं। अब तक 81 लोग कोरोना संक्रमण से पीड़ित पाए गए हैं उनमें से 75 दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासी ही है, इन प्रवासियों से निपटना ही प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। ऊपर से अब गैर प्रवासियों में जो कोरोना संक्रमण का दौर शुरू हुआ है इससे निपटना बड़ा ही मुश्किल भरा होगा। हालांकि गढ़वा की अब तक की उपलब्धि रही है कि यहां भले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या 81 के आंकड़ा तक पहुंच चुका है मगर अब तक किसी भी संक्रमित की मौत नहीं हुई है तथा 57 कोरोना का जंग जीतकर घर वापस लौट चुके हैं। कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वर्तमान समय की मांग है कि हम सबों को मिलजुल कर इस संकट से उबरने के लिए खुद से प्रयास करना होगा तथा अपने जीवन शैली में भी सुधार लाना होगा। क्योंकि अभी तक यही देखा जा रहा है कि अनलॉक डाउन -1 में जैसे - जैसे बाजार खुल रहा है, लोगों की भीड़ लग रही है, यहां तक कि अब शादी विवाह जैसे समारोह की भी तैयारी चल रही है। 11 जून से लग्न भी है ऐसे में यदि सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क पहनने तथा सैनिटाइजर इस्तेमाल की आदत लोगों के बीच नहीं रहेगी तो फिर कोरोना के संकट से तबाही मचा सकती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। गढ़वा जिले में लोग अभी भी कोरोना के बढ़ते फैलाव से सतर्क नहीं है। यह यकीनन कहा जा सकता है क्योंकि सब्जी बाजार हो अथवा अस्पताल यहां तक कि चौक चौराहों पर भी जो लोग दिखते हैं उसमें से बहुत सारे लोग बगैर मास्क लगाए नजर आएंगे, राह चलते सोशल डिस्टेंसिंग की अनुपालन नहीं किए जाने की हालात को देखा जा रहा है। हालत तो ऐसी भी है कि एक - एक निजी वाहन में पूर्व की भांति 6-7 लोग तक सफर कर रहे हैं। ऐसे में अब जरूरत है कि समाज का सभी तबका चाहे वह सामाजिक संगठन हो राजनीतिक संगठन हो या प्रशासन का त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था से जुड़े सभी जनप्रतिनिधि इन सबों के साथ मिलकर जिला प्रशासन को चाहिए एक ऐसी व्यवस्था बनाए जाएं जिसमें सभी लोग एक योजना के तहत संक्रमण से लड़ने के लिए खुद को तैयार हो जाएं और एक एक व्यक्ति को जागरूक करें तभी कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के खतरे से गढ़वा को बचाया जा सकता है।


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