विनय सिंह किंकर
मदनपुर
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर लॉक डाउन का असर मठ मंदिरों पर भी पड़ने लगा है. पिछले कई दिनों से मठ मंदिरों का चौखट श्रद्धालुओं के लिए बंद है. लिहाजा मंदिरों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने लगी है. बड़े मठ मंदिरों में मेला क्षेत्र विवाह भवन दुकानों व मंदिरों में किए गए विवाह मुंडन से भी लाखों की आय भी बंद है. दान- पात्र भी खाली है जिससे प्रतिदिन की आमदनी गायब है. यही स्थिति प्रखंड सहित जिले के सभी मठ मंदिरों की है
प्रखंड के उमंग ेश्वरी मंदिर सूर्य मंदिर सिताथापा मंदिर मटुक भैरवनाथ हदहदवा महादेव,बेरी भूरहा मंदिर, खिरियावा मानव घाट,वार मठ समेत अन्य मठ मंदिरो में श्रद्धालुओं का चढ़वा व दान नही मिल रहा है.जानकारी के मुताबिक प्रमुख मठ मंदिरो में लगभग एक माह में श्रद्धालुओं व भक्तो के दान से 30 हजार से 50 हजार तक मासिक की आमदनी प्रतिमाह होती थी.बताया जा रहा है कि जब से लॉक डाउन में मठ मंदिरो का दरवाजा आम श्रद्धालुओ व भक्तो के लिए बंद हुआ है. तब से मंदिरो की आर्थिक सेहत बिगड़ने लगी है.अभी मंदिरो में सुबह व शाम की पूजा अर्चना पुजारियों द्वारा ही संपादित किया जा रहा है.
अब पुजारी का हाथ भी खाली
श्रद्धालुओं के मठ मंदिर का रास्ता बंद होने से पुजारियों की आर्थिक हालत भी पस्त होने लगी है मंदिर की आय के कुछ हिस्से से पूजा पाठ कर रहे पुजारियों का भी खर्च चलता है. इधर लॉक डाउन की वजह से इस पर भी असर पड़ रहा है .पुजारियों का कथन है कि भगवान क्या रूठे हमारी भी आमदनी खत्म होने लगी है. आलम यह है कि कई का परिवार चलना भी मुश्किल होने लगा है. आर्थिक तौर पर मजबूत कुछ यजमान इनकी मदद में आगे आए लेकिन बाद में उन्होंने भी पांव पीछे खींच लिया. सीता थापा मंदिर के मुख्य पुजारी पारसनाथ बाबा कहते हैं कि श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश अभी निषेध है इस कारण से आमदनी नहीं हो पा रहा है
मुश्किल है मंदिर का खर्च चलाना
वर्तमान स्थिति में मंदिर का खर्च चलाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के पैसे से आंतरिक खर्च निकल जाता था मंदिर के पुजारी व अन्य सेवकों की भी थोड़ी बहुत आए हो जाती थी लेकिन लॉक डाउन के कारण हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं प्रत्येक रविवार को उमगा पहाड़ पर माता उमंग ेश्वरी के दरबार में पूजा के लिए लोगों को भीड़ जुटी थी वह भी बंद है उससे भी आमदनी होती थी लेकिन मंदिर बंद होने के कारण अब भक्त और श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे हैं जिसके कारण दान पेटी में कोई राशि नहीं मिल पा रहा है मंदिर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है साथ ही साथ परिवार का भरण पोषण भी आसान नहीं है