स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़: इसे खतरे की घंटी न कहें तो फिर क्या कहें ?? आने वाले वक़्त में भारतीय फ़ौज के लिए मुश्किलें और भी कठिन होने वाली हैं क्योंकि एक तरफ तो सरहद पार का आतंकवाद, दूसरा कश्मीर के अंदर के जेहादी ग्रुप्स और अब ये तुर्की से आने वाली नई मुसीबत। तुर्की के राष्ट्रपति जो खुद को मुस्लिम दुनिया का ख़लीफ़ा बनाने में लगे हैं और इसके लिए वो किस सीमा तक जा सकते हैं ये सोच कर ही हैरानी हो रही है। खलीफा बनना भी है तो मुस्लिमों का बने लेकिन हमारे देश भारत पर आँखें क्यों गड़ाये बैठे हैं ये। मैंने कुछ दिन पहले भी एक आर्टिकल में लिखा था कि हमारे कश्मीर में काफी तुर्किश मुस्लिम भी रहते हैं। क्यों रहते हैं, कब से रहते हैं ये सोचने और खोजने वाली बात है। ऐसा तो हो नहीं सकता की किसी भी भारतीय सरकार को ये पता न हो कि ये कब यहाँ आये और यहीं क्यों रहने लगे ?? देश के किसी बाकि हिस्से में ये क्यों नहीं गए। दूसरी अहम् बात तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन का पाकिस्तान प्रेम हमसे या किसी अन्य देश से छिपा हुआ तो कतई नहीं है। सयुंक्त राष्ट्र संघ के मंच से भी वो कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत को घेरने की कोशिश करते रहे हैं। अभी हाल ही में ग्रीस के जाने -माने पत्रकार और ग्रीस की न्यूज वेबसाइट Pentapostagma के एडिटर - इन - चीफ एंड्रियास माउंटजौरौली नअपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि एर्दोगन पाकिस्तान की सहायता के लिए कश्मीर में सीरिया के विद्रोही आतंकियों को भेजने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए तुर्की के अधिकारियों ने कई आतंकी गुटों से बात भी की है।
ग्रीस की अपनी न्यूज़ वेबसाइट https://www.pentapostagma.gr में प्रकाशित अपने आर्टिकल में एंड्रियास माउन्टजौरौली लिखते हैं कि सीरिया नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने अभी हाल ही में अपने मिलिशिया सदस्यों से कहा है कि तुर्की अपने यहाँ से कुछ यूनिट्स कश्मीर में तैनात करना चाहता है। सभी जानते हैं कि सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन है, जिसका उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर नियंत्रण हैं।
सूत्रों के हवाले से ये भी पता चला है कि अबू इम्सा ने कहा है कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य गिरोहों से भी उन लोगो के नाम मांग रहें हैंजो कश्मीर जाना चाहते हैं। अबू इम्सा ने ये भी कहा कि कश्मीर जाने वाले आतंकियों को तुर्की की तरफ से 2000 डॉलर की राशि भी दी जाएगी। कमांडर ने अपने गिरोह को ये भी बताया कि कश्मीर उतना ही पहाड़ी इलाका है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।