बंशीधर नगर : -गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र जी के अनुयायियों द्वारा जंगीपुर ग्राम स्थित सत्संग उपासना केन्द्र उर्जितपा के प्रांगण में विशेष सत्संग का आयोजन किया गया.
सत्संग का शुभारंभ शंख ध्वनि,बन्देपुरुषोतम ध्वनि के साथ दीप प्रज्वलित कर किया गया.इसके बाद सत्यानु शरण पाठ,नारी नीति का सामूहिक पाठ किया गया.इष्टचर्चा करते हुये ऋत्विक धृतिसुन्दर लाल ने कहा कि सद्गुरु ही भगवान के साक्षात रूप होते हैं.जो अभी वर्तमान पुरुषोत्तम श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र जी हैं.उन्होंने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि गुरु के आदेश का पालन करना सभी शिष्यों के कर्तव्य होताहै.उन्होंने यजन,याजन, इष्टभृति तथा सुबह व शाम में विनती प्रार्थना करने व सतनाम का स्मरण करने पर बल दिया.मनुष्य गुरु के बिना दुर्बल हृदय का होता है.दुर्बल हृदय में भक्ति का स्थान नही होता है.गुरु को ग्रहण कर मनुष्य सबल हृदय का हो जाता है.ऋत्विक विजय नंदन सिन्हा ने कहा कि गुरु सर्वदेवमय होते हैं. गुरु में अहंकार,स्वार्थचिन्ता तथा अप्रेम नही होता है.वे सभी जीवों से प्रेम करते हुये सभी को सत्मार्ग पर चलने का पथ दिखाते हैं. सद्गुरु में सभी देवी देवताओं का वास होता है.उन्होंने ज्ञानी व भक्त के बारे में कहा कि ज्ञानी अविश्वासी हो सकता है लेकिन भक्त पूर्ण रूपेण विश्वासी होता है.भक्त सिर्फ गुरु के आदेश का पालन निःसंकोच भाव से विश्वास के साथ करता है.उन्होंने कहा कि गुरु समय समय पर अपने शिष्य के कल्याण हेतु शिष्य की परीक्षा भी लेते हैं. इसलिये गुरु को अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाले पथ प्रदर्शक भी कहते है.कार्यक्रम का संचालन कर रहे सत्संगी अखिलेश प्रसाद ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुये कहा कि गुरु ही भगवान का दर्शन कराते हैं. उन्होंने आगामी 5 नवम्बर को श्री श्री ठाकुर जी के होने वाले जन्मोत्सव की तैयारी तथा गढवा में श्री श्री ठाकुर जी के मंदिर निर्माण के लिये सहयोग पर भी चर्चा किया.कार्यक्रम में अजय दा,राजकुमार, शक्तिदास सिन्हा,अशोक दा,गोविंद दा,प्रमोद चौबे,ब्रजेश तिवारी,श्रीकांत, धृतिदीप्त, प्रभा देवी,रमा देवी,वृन्दा देवी,पूजा देवी,गीता देवी,मधु कुमारी,रिशु,सिमरन सहित विभिन्न क्षेत्रों के सत्संगी उपस्थित थे.